देहरादून, खबर न्यू इंडिया (न्यूज़ डेस्क) : मंगलवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने एम्स के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर शिरकत की। राष्ट्रपति ने शैक्षणिक गतिविधियों में सर्वोच्च प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को स्वर्ण पदकों से नवाजा। इसके बाद वो परमार्थ निकेतन पहुंचकर गंगा घाट पर गंगा आरती में शामिल हुई. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि दीक्षांत समारोह में उपाधियां प्राप्त करने वाली महिलाओं का प्रतिशत अधिक है. यह एक सामाजिक बदलाव का संकेत है. उन्होंने कहा कि देशभर में बेहतर इलाज करने के कारण ही एम्स संस्थानों की विशिष्ट पहचान है. उन्होंने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र केवल एक प्रोफेशन ही नहीं, बल्कि यह एक मिशन भी है. इसके अलावा राष्ट्रपति ने देश में बढ़ रहे डाइबिटिज के मरीजों और धूप की कमी से महिलाओं में बढ़ रही एनिमिया की बीमारी के उपचार और इस दिशा में एम्स संस्थानों से अनुसंधान का आह्वान किया है.

राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि सर्वे संतु निरामया... यानी सभी लोग रोगमुक्त हों। यह हम लोगों की पारंपरिक प्रार्थना है। इस प्रार्थना में निहित आदर्श को एम्स ऋषिकेश ने वैश्विक स्वास्थ्य सेवा के लक्ष्य के रूप में अपनाया है। कहा एम्स का ध्येय वाक्य है.. विश्वारोग्यं हि धर्मो नः पूरे विश्व को सु-स्वस्थ एवं रोग-मुक्त बनाना हमारा धर्म, यानी आदर्श है। राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि एम्स के सभी छात्र, शिक्षक, चिकित्सक, नर्स संस्थान के इस ध्येय वाक्य को ही निजी जीवन और सेवा में अपना ध्येय वाक्य बनाएंगे। राष्ट्रपति ने कहा कि में सबसे अच्छा और कम से कम खर्च में इलाज होना भी एम्स की पहचान है। राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि आयुर्वेद सहित भारतीय परंपरा की उपचार पद्धतियों के लिए उत्तराखंड में अनेक लोकप्रिय स्वास्थ्य केंद्र हैं। एम्स ऋषिकेश में एलोपैथी के साथ-साथ आयुष चिकित्सा पद्धतियों से भी मरीजों का उपचार किया जा रहा है। राष्ट्रपति ने कहा कि मैं चाहूंगी कि व्यापक स्तर पर उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराते हुए उत्तराखंड की इस देवभूमि की ख्याति आरोग्य भूमि के रूप में भी स्थापित हो। राष्ट्रपति ने कहा कि संपन्न व सक्षम व्यक्ति के पास अपना उपचार कराने के अनेक माध्यम हैं, ऐसे में चिकित्सकों को प्रत्येक गरीब व अक्षम व्यक्ति के इलाज को प्राथमिकता देनी चाहिए. उन्होंने एम्स ऋषिकेश की चिकित्सकीय सेवाओं की सराहना की और कहा कि वैश्विक स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में संस्थान द्वारा उपलब्ध कराई जा रही बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की वजह से एम्स, ऋषिकेश की विशेष पहचान है.

बता दें कि दीक्षांत समारोह में मेडिकल के 598 छात्रों को उपाधि प्रदान की गई. जबकि, टॉपर छात्र-छात्राओं को 14 गोल्ड, 1 सिल्वर और 1 कांस्य समेत 16 पदकों से नवाजा गया. कार्यक्रम में उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों में एमबीबीएस 2013 बैच से एक, 2015 बैच से 1 और 2017 बैच के 98 छात्र-छात्राएं शामिल हैं. इसके अलावा बीएसएसी नर्सिंग 2017 बैच के 57, बीएससी नर्सिंग 2018 बैच के 97 और बीएससी नर्सिंग 2019 बैच के 100 छात्र-छात्राओं को उपाधियों से सम्मानित किया गया है. एमएससी नर्सिंग के 2021 बैच के कुल 9 छात्र-छात्राओं को भी डिग्री प्रदान की गई. समारोह में एमडी/एमएस में 2020 बैच के 4, 2021 बैच के 111, डीएम/एमसीएच में 2021 बैच के 31, मास्टर ऑफ पब्लिक हेल्थ 2022 बैच के 10 और बीएससी एलाईड हेल्थ साइंस 2019-20 बैच के 67 स्टूडेंट्स सहित पीएचडी करने वाले वर्ष 2017-19 बैच के 12 छात्र-छात्राओं को उपाधि देकर सम्मानित किया गया है.

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