सपा गठबंधन के ज्यादातर मुस्लिम प्रत्याशियों को मिली कामयाबी !
लखनऊ (न्यूज़ डेस्क): यूपी के विधानसभा चुनावों में बीजेपी को प्रचंड जीत मिली है. सरकार पूर्ण बहुमत के साथ एक बार फिर वापस आई है. यूपी में एक ही पार्टी की लगातार दूसरी बार सरकार बनाने का यह रिकॉर्ड मुख्यमंत्री योग आदित्यनाथ के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है. यूपी विधानसभा चुनाव में सपा गठबंधन सत्ता में आने में नाकाम रहा. लेकिन गठबंधन के मुस्लिम प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की. बीजेपी गठबंधन में अपना दल ने एक मुस्लिम प्रत्याशी को टिकट दिया था. जबकि सपा गठबंधन ने 63 और बसपा ने 86 मुस्लिम प्रत्याशी उतारे थे. कांग्रेस ने भी करीब 60 सीटों पर मुस्लिम प्रत्याशी दिए थे. यूपी के पहले दो चरणों में सपा गठबंधन के ज्यादातर मुस्लिम प्रत्याशियों को कामयाबी मिली. इनमें कैराना से नाहिद हसन, रामपुर से आजम खां, स्वार से अब्दुल्ला आजम की जीत शामिल है. थानाभवन से अशरफ अली ने योगी सरकार में मंत्री रहे सुरेश राणा को हरा दिया. हालांकि तमाम सीटों पर मुस्लिम प्रत्य़ाशी होने और अन्य पर मुस्लिमों के 30-40 फीसदी वोट होने के बावजूद गठबंधन के उम्मीदवार जीत दर्ज नहीं कर पाए. उत्तर प्रदेश में मुस्लिम आबादी करीब 19 फीसदी है. यूपी में 85 सीटें ऐसी थीं, जिनमें मुस्लिमों की जनसंख्या 25 से 50 फीसदी तक रही है. जबकि 60 अन्य सीटों पर उनकी आबादी 20 से 25 फीसदी के बीच थी. यानी ऐसी 145 सीटें रहीं, जहां मुस्लिम प्रत्याशी निर्णायक भूमिका निभाने की स्थिति में थे. हालांकि बीजेपी ने पिछली बार अल्पसंख्यक वोटों के बंटवारे के कारण इसमें से ज्यादातर सीटें जीत ली थीं. मेरठ, मुजफ्फरनगर, मुरादाबाद, बरेली, बहराइच, सहारनपुर, रामपुर, बिजनौर, बलरामपुर, श्रावस्ती, गाजियाबाद, बागपत, गौतमबुद्ध नगर औऱ ज्योतिबा फुले नगर में मुस्लिम जनसंख्या 25 से 50 फीसदी के बीच है. जबकि अलीगढ़, बाराबंकी, बदायूं, बुलंदशहर, पीलीभीत, लखनऊ, लखीमपुर खीरी, संत कबीरनगर, सुल्तानपुर में उनकी जनसंख्या 20 से 25 प्रतिशत के बीच है.
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