लोकसभा में एक देश एक चुनाव विधेयक पेश
खबर न्यू इंडिया (न्यूज़ डेस्क): आज लोकसभा में 'वन नेशन, वन इलेक्शन' बिल को पेश किया गया . केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने विधेयक को सदन के पटल पर रखा। वही एक देश एक चुनाव बिल पेश होने के बाद विपक्ष ने विरोध शुरू कर दिया है. पहले कांग्रेस नेता ने इसका विरोध किया और फिर बाद में समाजवादी पार्टी ने कहा कि यह संविधान विरोधी बिल है. अखिलेश यादव ने कहा है कि यह फ़ैसला सच्चे लोकतंत्र के लिए घातक साबित होगा. ये देश के संघीय ढांचे पर भी एक बड़ी चोट करेगा. इससे क्षेत्रीय मुद्दों का महत्व ख़त्म हो जाएगा और जनता उन बड़े दिखावटी मुद्दों के मायाजाल मे फंसकर रह जाएगी, जिन तक उनकी पहुंच ही नहीं है. हमारे देश में जब राज्य बनाए गए तो ये माना गया कि एक तरह की भौगोलिक, भाषाई व उप सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के क्षेत्रों को ‘राज्य’ की एक इकाई के रूप में चह्नित किया जाए. इसके पीछे की सोच ये थी कि ऐसे क्षेत्रों की समस्याएं और अपेक्षाएं एक सी होती हैं, इसीलिए इन्हें एक मानकर नीचे-से-ऊपर की ओर ग्राम, विधानसभा, लोकसभा और राज्यसभा के स्तर तक जन प्रतिनिधि बनाएं जाएं. इसके मूल में स्थानीय से लेकर क्षेत्रीय सरोकार सबसे ऊपर थे. ‘एक देश-एक चुनाव’ का विचार इस लोकतांत्रिक व्यवस्था को ही पलटने का षड्यंत्र है.
वन नेशन वन इलेक्शन पर कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा, 'यह भारत के संविधान और नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों पर एक हमला है जिसका पुरजोर विरोध कांग्रेस पार्टा और INDIA गठबंधन करेगा। यह बिल भाजपा की मंशा व्यक्त करता है कि वो किस प्रकार से भारत के चुनाव की निष्पक्षता को छिनने की कोशिश कर रहे हैं। भारत में निष्पक्ष चुनाव की हमारी मांग है।'
वन नेशन, वन इलेक्शन विधेयक पर कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने कहा, "हम इस विधेयक का कड़ा विरोध करते हैं. मल्लिकार्जुन खरगे ने 17 जनवरी को पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को पत्र लिखा था कि कांग्रेस पार्टी इस विधेयक का विरोध क्यों और किस कारण कर रही है. हम वन नेशन, वन इलेक्शन के विधेयक को संविधान के खिलाफ मानते हैं. लोकतंत्र को हटाने के लिए यह चलाया जा रहा है. वन नेशन, वन इलेक्शन संविधान बदलने का एक बिगुल है."
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