टपकेश्वर मंदिर: नहीं टूटी बाबा टपकेश्वर महादेव के भक्तों की भक्ति
देहरादून, खबर न्यू इंडिया (न्यूज़ डेस्क): नहीं टूटी बाबा टपकेश्वर महादेव के भक्तों की भक्ति आपदा के बाद भी मंदिर को पहले जैसा सुंदर स्वरूप में लाने के लिए गुरुवार तक सेवा दल और कई संस्थाओं के लोग जुटे रहे सफाई के साथ साथ पेड़ ओर बोल्डर हटाए गए मंगलवार सुबह तमसा नदी का जलस्तर बढ़ने से टपकेश्वर मंदिर में तबाही का मंजर अलग ही था पहली बार इतना जलस्तर बढ़ा कि पुल के साथ ही मंदिर में बनी शिवजी की मूर्ति तक बह गई जलस्तर घटा तो हर जगह मलबा ओर कूड़ा था गर्भगृह ओर देवी देवताओं की मूर्तियां सुरक्षित रही शिव लिंग के पास कही फुट तक मलबा जमा हो चुका था मंगलवार को ही सेवादल और शिव भक्तों ने सेवा शुरू कर दी थी साफ सफाई होने के बाद मंगलवार को बाबा की आरती की गई और सोमवार की रात से ही मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए थे अब बुधवार से महंत 108 श्री किशन गिरी जी महाराज एवं दिगम्बर भरत गिरी जी महाराज जी के आदेश पर भक्तों के लिए कपाट दर्शन हेतु श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए है.

दरअसल मंगलवार को टपकेश्वर मंदिर में तमसा नदी के विकराल रूप के बाद तबाही का मंजर ऐसा था कि हर कोई हैरान था। राजधानी देहरादून के गढ़ीकैंट क्षेत्र में स्थित सालों पुराना प्राचीन टपकेश्वर महादेव मंदिर की तस्वीर बदल गई है. प्रदेश के हिमालय क्षेत्र पर हुई भारी बारिश और मालदेवता क्षेत्र में बादल फटने की घटना होने के बाद टपकेश्वर महादेव मंदिर के समीप से बह रही तमसा नदी पूरे उफान पर आ गई. तमसा नदी का जलस्तर लगभग 30 फीट ऊंचाई तक देखा गया. पहली बार ऐसा हुआ है, जब तमसा नदी पहाड़ से आए मलबे के साथ टपकेश्वर महादेव मंदिर की गुफा में भी चली गई. तपेश्वर महादेव मंदिर के चारों तरफ मौजूद अन्य मंदिर परिसर पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया. मंदिर में स्थापित करीब 25 फीट की हनुमानजी की मूर्ति के गले तक पानी पहुंच गया। सुबह करीब आठ बजे नदी का जलस्तर कम हुआ तो पुजारी समेत अन्य लोग मंदिर पहुंचे। इस दरमियान यहां का मंजर देख कांप उठे। मंदिर में पेड़ और बोल्डर पड़े मिले जिनसे रास्ते तक बंद हो गए थे। कई जगह रेलिंग टूटी मिली तो कही दीवार क्षतिगस्त हो गया था। मलबा भी कई फीट तक जमा मिला।

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