खबर न्यू  इंडिया (न्यूज़ डेस्क):   देश की शीर्ष अदालत सुप्रीम कोर्ट ने शैक्षणिक संस्थानों, बस स्टैंडों, रेलवे स्टेशनों, खेल परिसरों, अस्पतालों आदि जगहों से आवारा कुत्तों को हटाने के अपने पूर्व के निर्देशों को बदलने से इनकार कर दिया और कुत्तों को नसबंदी के बाद वापस पुरानी जगहों पर छोड़ने का निर्देश देने से इनकार कर दिया। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के मामले में आदेश देते हुए यह भी कहा कि गंभीर रूप से बीमार और खतरनाक कुत्तों को मारने पर विचार हो. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि बच्चों, बुजुर्गों को कुत्ते काट रहे हैं. हम ऐसी स्थिति से आंखें नहीं मूंद सकते. उन्होंने कहा कि एनिमल वेलफेयर बोर्ड के SOP के खिलाफ सभी आवेदन हम खारिज कर रहे हैं. शीर्ष अदालत ने भारतीय पशु कल्याण बोर्ड (AWBI) द्वारा आवारा जानवरों को लेकर जारी मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाएं भी खारिज कर दीं। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने सुनवाई की।
पीठ ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत सम्मान से जीने के अधिकार में हर नागरिक का आजादी से घूमने और सार्वजनिक स्थानों पर जाने का अधिकार शामिल है, बिना किसी शारीरिक नुकसान, हमले या सार्वजनिक स्थानों पर कुत्ते के काटने जैसी जानलेवा घटनाओं के डर के. जस्टिस मेहता ने कहा कि अगर कुत्ते के काटने की घटनाओं को बिना रोक-टोक के होने दिया गया, तो इसका नतीजा यह हो सकता है कि हम ऐसी स्थिति में वापस चले जाएं जहां डार्विन का विकास का सिद्धांत – यानी, सबसे फिट इंसान ही बचेगा – नागरिक जीवन और सार्वजनिक स्थानों पर प्रभावी तरीके से राज करेगा. जस्टिस मेहता ने कहा, "ऐसी स्थिति कानून के राज से चलने वाले संवैधानिक लोकतंत्र के साथ पूरी तरह से मेल नहीं खाएगी. डॉग लवर्स ने अपनी याचिका में तर्क दिया था कि आवारा कुत्तों को सार्वजनिक स्थानों से हटाने का आदेश बहुत कठोर है और इससे कुत्तों के अधिकारों का हनन हो रहा है। उन्होंने पशु जन्म नियंत्रण कार्यक्रम को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इन दलीलों को खारिज करते हुए जनहित और सार्वजनिक सुरक्षा को प्राथमिकता दी।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वह 17 नवंबर को हर राज्य की कंप्लायंस रिपोर्ट देखेगा. कुल मिला कर सुप्रीम कोर्ट ने अपने पुराने आदेशों को बरकरार रखा है. इसमें हर सार्वजनिक परिसर से कुत्तों को बाहर करना भी शामिल है. कोर्ट ने अपने आदेश में कुछ अहम निर्देश दिए हैं, वो ये हैं-

राज्य और केंद्र शासित क्षेत्र ABC फ्रेमवर्क का पालन करें.
हर शहर में इसके लिए सेंटर हो.
कर्मचारियों को उचित ट्रेनिंग दी जाए.
एंटी रैबीज वैक्सीन उपलब्ध करवाई जाए.
NHAI हाई वे से आवारा मवेशियों को हटाने के लिए कदम उठाए.
गौशाला बनाई जाए. इन्हें वहां भेजा जाए.
गंभीर रूप से बीमार और खतरनाक कुत्तों को मारने पर विचार हो.
हमारे आदेशों के पालन में कदम उठा रहे अधिकारियों को उनका काम करने दिया जाए. उनके खिलाफ कोई अदालत अपरिहार्य स्थिति में ही सुनवाई करे.

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