खबर न्यू  इंडिया (न्यूज़ डेस्क): नीट पेपर लीक विवाद और पिछले कई हफ्तों से चल रहे भारी विरोध प्रदर्शनों और चौतरफा दबाव के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। मोदी सरकार के 12 साल के कार्यकाल में यह पहला इस्तीफा है. केंद्रीय शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर सीजेपी के फाउंडर अध्यक्ष अभिजीत दिपके ने कहा, 'यह भारत के संविधान की जीत है. यह भारत के लोगों की जीत है.' मेडिकल छात्रों के भविष्य से जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे पर सरकार की चौतरफा आलोचना हो रही थी और इस इस्तीफे को परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही तय करने की दिशा में एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे का पत्र जारी किया। जिसमें उन्होंने लिखा- मेरे युवा साथियों, मैं पिछले चार दशकों से अधिक समय से छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधार के लिए समर्पित रहा हूं। मेरा सदैव यह विश्वास रहा है कि एक सशक्त, समावेशी और दूरदर्शी शिक्षा व्यवस्था ही सशक्त राष्ट्र की आधारशिला होती है।

नई दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्ल्ब में सरकार और सीजेपी के डेलीगेशन की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई. शिक्षामंत्री के इस्तीफे के बाद यह प्रेस कॉन्फ्रेंस की गई. तीसरे दौर की बातचीत के बाद सीजेपी की मांग सरकार ने मान ली है. साथ ही सीजेपी ने आंदोलन खत्म करने का ऐलान कर दिया है. कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में केंद्रीय मंत्रियों जेपी नड्डा और डॉ जितेंद्र सिंह के साथ कॉकरोच जनता पार्टी के प्रतिनिधियों सौरव दास और आशुतोष रांका के साथ बातचीत हुई, इसके बाद प्रेस के जरिए ऐलान किया है.

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