लखनऊ,खबर न्यू इंडिया (न्यूज़ डेस्क):  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्वी पाकिस्तान से विस्थापित 63 हिंदू बंगाली परिवारों के पुनर्वास के लिए कृषि व आवासीय भूमि का पट्टा और स्वीकृति पत्र वितरित किया और कहा कि 38 वर्षों का आपका इंतजार आज खत्म हुआ। योगी ने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले ये सरकारों के पास हमेशा जाते थे, लेकिन संवेदनहीन सरकारें कभी इनकी बातों को गंभीरता से नहीं लेती थीं। इस मौके पर मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि 38 वर्षों का इंतजार समाप्त हुआ। इन सभी 63 परिवारों को राज्य सरकार की तरफ से कानपुर देहात के रसूलाबाद में प्रत्येक परिवार को दो एकड़ भूमि 200 वर्ग मीटर का आवासीय पट्टा और मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत आवास का लाभ दिया जा रहा है। साथ में शौचालय भी दिया गया। पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए योगी ने कहा कि ये सरकारों के पास हमेशा जाते थे लेकिन संवेदनहीन सरकारें कभी इनकी बातों को गंभीरता से नहीं लेती थी। उन्होंने सवाल उठाया कि जो गरीबों की बात करते थे, आखिर इन गरीबों की पीड़ा उनके कानों तक क्यों नहीं पहुंच पा रही थी, क्यों नहीं मुसहर जाति के लोगों के लिए उन लोगों ने कोई कार्य किया, वनटांगिया गांवों के लोग अनाथ क्यों बन गये थे। उन्होंने कहा कि 1970 में ये सभी परिवार आज के बांग्लादेश और उस समय के पूर्वी पाकिस्तान से विस्थापित होकर भारत आए थे। हस्तिनापुर में एक सूत मिल में इन्हें नौकरी दी गई और ये लगभग 407 परिवार थे। विस्थापितों की जिंदगी की चर्चा करते हुए योगी ने कहा कि 1984 में सूत मिल बंद हो गई और इसके बाद कुछ परिवारों का पुनर्वास अलग-अलग जगहों पर देश में हुआ, लेकिन 65 परिवार ऐसे थे जो 1984 से लेकर अब तक अपने पुनर्वास की प्रतीक्षा कर रहे थे। प्रतीक्षा कर रहे परिवारों में बहुत से लोग दिवंगत हो गये और दो परिवार पूरी तरह समाप्त हो गए।