नई दिल्ली,खबर न्यू इंडिया (न्यूज़ डेस्क): राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर राज्यसभा में हुई चर्चा का जवाब देते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने विपक्ष को आड़े हाथों लिया, प्रधानमंत्री ने जैसे ही जवाब देना आरंभ किया वैसे ही कांग्रेस, आम आदमी पार्टी सहित कुछ विपक्षी दलों के सदस्य आसन के निकट आ गए और नारेबाजी करने लगे. सदस्यों की नारेबाजी के बीच मोदी ने कहा, यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इतने महत्वपूर्ण सदन में कुछ लोगों का व्यवहार, कुछ लोगों की वाणी ना सिर्फ सदन को बल्कि देश को निराश करने वाली रही है.

विपक्ष की नारेबाजी के बीच पीएम मोदी मोदी ने कहा कि हमने सामाजिक न्याय, दो वक्त की रोटी जैसी समस्याओं का समाधान निकाला है, आपने इसका समाधान नहीं निकाला था. हम आजाद भारत के सपनों को पूरा करने के लिए संकल्पबद्ध होकर चले हैं. विपक्ष को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने सीना ठोकते हुए कहा कि सभापति जी देश देख रहा है एक अकेला कितनों पर भारी पड़ रहा है... एक अकेला कितनों को भारी पड़ रहा है. नारे बोलने के लिए भी इनको (सांसदों को) बदलना पड़ता है. मोदी ने कहा कि सदन में कुछ लोगों का व्यवहार और वाणी न सिर्फ सदन को बल्कि देश को निराश करने वाली है। माननीय सदस्यों को मैं कहूंगा, "कीचड़ उसके पास था मेरे पास गुलाल... जो भी जिसके पास था उसने दिया उछाल।" जितना कीचड़ उछालोगे कमल उतना ज्यादा खिलेगा। पीएम मोदी ने विपक्षी दलों पर तंज कसते हुए कहा कि इसलिए कमल खिलाने में उनका भी प्रत्यक्ष व परोक्ष योगदान है. उन्होंने कहा, इसके लिए मैं उनका भी आभार व्यक्त करता हूं. 

पीएम मोदी ने राज्यसभा में पूर्व पीएम जवाहर लाल नेहरू का जिक्र करते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा. पीएम मोदी ने कहा कि, "कुछ लोगों को सरकार योजनाओं के नामों में संस्कृत शब्दों से दिक्कत थी. मैंने रिपोर्ट में पढ़ा कि 600 सरकारी योजनाएं गांधी-नेहरू परिवार के नाम पर थीं फिर भी नेहरू जी का नाम क्यों नहीं लिया जाता. किसी कार्यक्रम में अगर नेहरू जी के नाम का जिक्र नहीं किया जाता है तो कुछ लोगों के बाल खड़े हो जाते हैं. लहू गर्म हो जाता है कि नेहरू जी का नाम क्यों नहीं लिया गया." पीएम मोदी ने आगे कहा कि, "मुझे बहुत आश्चर्य होता है कि चलो भाई मुझसे कभी छूट जाता होगा नेहरू जी का नाम. हम इसे ठीक भी कर लेंगे क्योंकि देश के पहले प्रधानमंत्री थे, लेकिन मुझे समझ नहीं आता है कि उनकी पीढ़ी का कोई व्यक्ति नेहरू सरनेम रखने से डरता क्यों है? नेहरू सरनेम रखने से शर्मिंदगी क्यों है. नेहरू सरनेम रखने से क्या शर्मिंदगी है? इतना बड़ा महान व्यक्तित्व...आपको मंजूर नहीं है...परिवार को मंजूर नहीं है और आप हमारा हिसाब मांगते हो." 

हमारी देश में पहले परियोजनाएं अटकाना, लटकाना, भटकाना ये उनकी कार्यशैली का हिस्सा बन गया था। यही उनका कार्य करने की तरीका था। ईमानदार टैक्स पेयर्स की कमाई का नुकसान होता था। हमनें टेक्नोलॉजी को तैयार किया। पीएम गतिशक्ति प्लान लेकर आए। 1600 लेयर में डेटा के जरिए विकास को गति देने का काम हो रहा है। पहले की सरकारों में कुछ घंटे बिजली आती थी। गांव के बीच में खंबा डाल दिया तो हर साल उसका समाचार बनाते थे। आज औसत हमारे देश में 22 घंटे बिजली दी जा रही है। हमें इस काम के लिए नई ट्रांसमिशन लाइन लगानी पड़ी। नए ऊर्जा उत्पादन के लिए काम करना पड़ा। सौर ऊर्जा के क्षेत्र में काम करना होगा। हमने लोगों को उनके भाग्य पर नहीं छोड़ा। राजनीति घाटे-फायदे के बारे में नहीं सोचा। आने वाले कल को उज्जवल करने के बारे में सोचा।

आजादी के अमृतकाल में हिम्मत भरा कदम उठाया। हर योजना के लाभार्थियों को शत-प्रतिशत लाभ कैसे पहुंचे। सरकार इस रास्ते पर ईमानदारी के साथ चल रही है। हमने इसका संकल्प लिया है। सैचुरशन तक पहुंचने का मतलब होता है। भेदभाव की सारी गुंजाइश खत्म करना। यह तुष्टिकरण की आशंकाओं को खत्म कर देता है। सामाजिक न्याय की ये असली गारंटी है। ये सच्चा सेक्युलरिज्म है। मोदी ने कहा कि कांग्रेस को बार-बार देश नकार रही है, लेकिन कांग्रेस और उसके साथी अपनी साजिशों से बाज नहीं आ रही है। जनता इसे देख रही है और उनको हर मौके पर सजा भी दे रही है।2014 से पहले जब उनकी सरकार थी, तब एलोकेशन 20-25 हजार करोड़ रुपये के आसपास रहता था। हमने इस साल 1 लाख 20 हजार करोड़ का प्रावधान किया है। हमने बीते 9 सालों में आदिवासी, जनजातीय भाइयों, बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए 500 नए एकलव्य मॉडल स्कूल पास किए हैं। ये चार गुना ज्यादा बढ़ोतरी है। स्कूलों में हमने 38 हजार लोगों की भर्तियों का प्रावधान किया है। मोदी ने कहा कि आदिवासियों की भावनाओं के साथ खेलने के बजाए अगर कुछ किया होता तो मुझे इतनी मेहनत करनी नहीं होती। ये काम पहले हो सकता था, लेकिन ये उनकी प्राथमिकता में नहीं था।

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