खबर न्यू इंडिया (न्यूज़ डेस्क):  आज से संसद के बजट सत्र की शुरुआत हो चुकी है। लोकसभा चुनाव 2024 से पहले मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का यह आखिरी बजट सत्र होगा. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बजट सत्र की शुरुआत के मौके पर लोकसभा और राज्यसभा के संयुक्त सत्र को संबोधित किया। उन्होंने लगभग 74 मिनट के संबोधन में सरकार के विजन और देश में बीते 10 साल की अवधि में हुए कामकाज का विस्तार से जिक्र किया। इस मौके पर उन्होंने इसे दौरान कहा कि भारत आज हर क्षेत्र में विकास कर रहा है. केंद्र सरकार नारी शक्ति से लेकर युवाओं को नई पहचान देने के लिए कई क्षेत्र में काम कर रही है. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने अभिभाषण में अयोध्या के राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा का जिक्र किया। इस पर सदन में मौजूद सदस्यों ने मेज थपथपाकर बयान का स्वागत किया।

राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में पिछले 10 वर्षों में मोदी सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख किया। उन्होंने जम्मू कश्मीर से आर्टिकल-370 हटाने, तीन तलाक के विरुद्ध कड़ा कानून, पड़ोसी देशों से आए पीड़ित अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने वाला सीएए कानून बनाने और पूर्व सैनिकों के लिए वन रैंक वन पेंशन को लागू करने का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना में पहली बार चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ की नियुक्ति भी हुई है।

राष्ट्रपति ने इस दौरान भारत की चंद्रमा पर लैंडिंग और एशियाई खेलों में प्रदर्शन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, “बीता वर्ष भारत के लिए ऐतिहासिक उपलब्धियों से भरा रहा है। इस दौरान भारत सबसे तेजी से विकसित होती बड़ी अर्थव्यवस्था बना। भारत, चंद्रमा के दक्षिण ध्रुव पर झंडा फहराने वाला पहला देश बना। ऐतिहासिक जी-20 सम्मेलन की सफलता ने पूरे विश्व में भारत की भूमिका को सशक्त किया। भारत ने एशियाई खेलों में पहली बार 100 से अधिक मेडल जीते। भारत, दुनिया में सबसे तेजी से 5जी रोलआउट करने वाला देश बना।”राष्ट्रपति ने बजट सत्र से पहले दोनों सदनों को संबोधित करते हुए कहा कि नए संसद भवन का निर्माण ‘अमृत काल’ की शुरुआत के दौरान किया गया है और इसमें ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ का सार है। नए संसद भवन में नीतियों पर सार्थक संवाद की उम्मीद जताते हुए राष्ट्रपति ने कहा, “मेरी सरकार, 140 करोड़ देशवासियों के सपनों को पूरा करने की गारंटी के साथ आगे बढ़ रही है। मुझे पूरा विश्वास है कि यह नया संसद भवन भारत की ध्येय-यात्रा को निरंतर ऊर्जा देता रहेगा, नई और स्वस्थ परंपराएं बनाएगा। वर्ष 2047 को देखने के लिए अनेक साथी तब इस सदन में नहीं होंगे। लेकिन हमारी विरासत ऐसी होनी चाहिए कि तब की पीढ़ी हमें याद करे।”

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