भारत के रत्न कहे जाने वाले दिग्गज उद्योगपति रतन टाटा का निधन
खबर न्यू इंडिया (न्यूज़ डेस्क) : भारत के रतन कहे जाने वाले दिग्गज उद्योगपति रतन टाटा अब हमारे बीच नहीं रहे, उनके निधन ने पूरी दुनिया को गहरा दुख दिया है. पीएम मोदी समेत देश दुनिया के लोगों ने गहरी संवेदना व्यक्त की है. रतन टाटा का पार्थिव शरीर NCPA ग्राउंड में रखा गया है, जहां साढ़े 3 बजे तक जनता उनके अंतिम दर्शन कर सकेगी. इसके बाद उनके पार्थिव शरीर को वर्ली श्मशान घाट ले जाया जाएगा, जहां पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा. 86 साल की उम्र में भी सक्रिय शीर्ष उद्योगपति ने बुधवार रात करीब 11:30 बजे मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में अंतिम सांस ली। टाटा समूह 2023-24 में 13 लाख 85 हजार करोड़ रुपये के राजस्व के साथ दुनिया के सबसे बड़े उद्योग समूहों में से एक है। भारत के रतन कहे जाने वाले दिग्गज उद्योगपति रतन टाटा अरबपतियों में शामिल होने के बावजूद अपनी सादगी से हर किसी का दिल जीत लेते थे। वह उन शख्सियतों में शुमार थे, जिनका हर कोई सम्मान करता था। कई मौकों पर उन्होंने गरीब और जरूरतमंद लोगों की मदद कर भारतीयों को गर्व महसूस कराया।
रतन टाटा के निधन पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की तरफ से भी बयान जारी किया गया है. उन्होंने लिखा कि भारत ने एक ऐसे प्रतीक को खो दिया है जिसने राष्ट्र निर्माण के साथ कॉर्पोरेट विकास और नैतिकता के साथ उत्कृष्टता का मिश्रण किया. रतन टाटा के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोएल टाटा से बात की और संवेदना व्यक्त की. उन्होंने रतन टाटा को एक दूरदर्शी बिजनेस लीडर, दयालु और असाधारण इंसान बताया. उन्होंने भारत के सबसे पुराने और सबसे प्रतिष्ठित व्यापारिक घरानों में से एक को स्थिर नेतृत्व प्रदान किया. साथ ही, उनका योगदान बोर्डरूम से कहीं आगे तक गया.केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भारत सरकार की ओर से रतन टाटा के अंतिम संस्कार में शामिल होंगे. भारत सरकार की ओर से शाह रतन टाटा को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे. गृह मंत्री रतन टाटा के अंतिम संस्कार के लिए मुंबई जाएंगे क्योंकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आसियान-भारत और पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए लाओस दौरे पर हैं. रतन टाटा की शख्सियत को देखें, तो वह सिर्फ एक बिजनेसमैन नहीं, बल्कि सादगी से भरे नेक और दरियादिल इन्सान, लोगों के लिए आदर्श और प्रेरणास्रोत भी थे। अपने समूह से जुड़े छोटे से छोटे कर्मचारी को भी अपने परिवार की तरह मानते थे और उनका ख्याल रखने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ते थे। उनके व्यक्तित्व का एक और पहलू उम्र के सात दशक पूरे करने के बावजूद सक्रिय रहना रहा। रतन टाटा के निधन पर पूरा देश उन्हें आखिरी सलाम कर रहा है. इसी कड़ी में महाराष्ट्र और झारखंड सरकार ने गुरुवार को एक दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है.
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