‘तीलू रौतेली’ ऐतिहासिक गढ़वाली नाटक का होगा आयोजन
देहरादून, खबर न्यू इंडिया (न्यूज़ डेस्क): तीलू रौतेली , गढ़वाल, उत्तराखण्ड की एक ऐसी वीरांगना जो केवल 15 वर्ष की उम्र में रणभूमि में कूद पड़ी थी और सात साल तक जिसने अपने दुश्मन राजाओं को कड़ी चुनौती दी थी। 22 वर्ष की आयु में सात युद्ध लड़ने वाली तीलू रौतेली एक वीरांगना है। तीलू रौतेली उर्फ तिलोत्तमा देवी भारत की रानी लक्ष्मीबाई, चांद बीबी, झलकारी बाई, बेगम हजरत महल के समान ही देश विदेश में ख्याति प्राप्त हैं। सबसे पहले तीलू रौतेली ने खैरागढ़ (वर्तमान कालागढ़ के समीप) को कन्त्यूरों से मुक्त करवाया, उसके बाद उमटागढ़ी पर धावा बोला, फिर वह अपने सैन्य दल के साथ "सल्ड महादेव" पंहुची और उसे भी शत्रु सेना के चंगुल से मुक्त कराया। चौखुटिया तक गढ़ राज्य की सीमा निर्धारित कर देने के बाद तीलू अपने सैन्य दल के साथ देघाट वापस आयी. कालिंका खाल में तीलू का शत्रु से घमासान संग्राम हुआ, सराईखेत में कन्त्यूरों को परास्त करके तीलू ने अपने पिता के बलिदान का बदला लिया; इसी जगह पर तीलू की घोड़ी "बिंदुली" भी शत्रु दल के वारों से घायल होकर तीलू का साथ छोड़ गई।
पहली बार 50 प्रतिभाशाली कलाकारों का एक दल गढवाल की एक निडर महिला योद्धा, तीलू रौतेली की पौराणिक कहानी को जीवंत करने जा रहा है। तीलू रौतेली नामक नाटक का मंचन इस रविवार को रिस्पना पुल स्थित सांस्कृतिक ऑडिटोरियम में किया जाएगा और यह उत्तराखण्ड के लिए एक ऐतिहासिक सांस्कृतिक कार्यक्रम होने का वादा करता है। मूल रूप से पौड़ी की रहने वाली प्रसिद्ध मंच कलाकार वसुंधरा नेगी तीलू रौतेली की मुख्य भूमिका निभाएंगी, जिसमें इस युवा योद्धा की प्रेरक यात्रा को दर्शाया जाएगा, जिसने दुश्मन ताकर्ता को चुनौती दी और गढ़वाल के इतिहास को फिर से परिभाषित किया।
कलर्ड चेकर्स फिल्म एंड एंटरटेनमेंट लिमिटेड द्वारा प्रस्तुत इस नाटक का उद्देश्य दर्शकों को तीलू रौतेली (जन्म तिलोत्तमा देवी) की असाधारण कहानी से परिचित कराना है, जिन्होंने 15 साल की उम्र में युद्ध के मैदान में प्रवेश किया और सात वर्षों में सात युद्ध लड़े। एक योद्धा और सांस्कृतिक प्रतीक के रूप में उनकी विरासत ने भारत और विदेश दोनों में पीढ़ियों को प्रेरित किया है।
आयोजक वैभव गोयल ने बताया कि किसी असाधारण कहानी को नाटक के माध्यम से आम जन तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है, उत्तराखण्ड में आगे भी नाटकों के माध्यम से प्रतिभाओं को उभारने का काम किया जाएगा। कार्यक्रम संयोजक राजेंद्र सिंह रावत ने बताया उत्तराखंड सरकार ने भी तीलू रौतेली पेंशन योजना के माध्यम से तीलू रौतेली की विरासत का सम्मान किया है, यह योजना कृषि कार्य के दौरान घायल या विकलांग हुई महिलाओं को समर्पित है, जो राज्य भर में महिलाओं को सशक्त बनाने में उनकी कहानी की स्थायी प्रासंगिकता को दर्शाती है। यह नाटक शाम 5:30 बजे रिस्पना पुल स्थित सांस्कृतिक ऑडिटोरियम में आयोजित होगा।
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