वक्फ पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछे कई सवाल
खबर न्यू इंडिया (न्यूज़ डेस्क): सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली और जस्टिस संजय कुमार और न्यायमूर्ति के वी विश्वनाथन की बेंच ने नए वक्फ अधिनियम को चुनौती देने वाली 73 याचिकाओं पर आज सुनवाई की. इस सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा- 'क्या आप अब हिंदू धार्मिक ट्रस्टों में मुसलमानों को भी शामिल करेंगे? अगर हां, तो खुलकर कहिए।' कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर कोई संपत्ति 100-200 साल पहले वक्फ घोषित हुई है, तो उसे अब अचानक से बदला नहीं जा सकता। कोर्ट ने आगे कहा- 'आप इतिहास को दोबारा नहीं लिख सकते'। सुप्रीम कोर्ट ने एक और अहम बात कही- वक्फ बोर्ड और सेंट्रल वक्फ काउंसिल के सभी सदस्य मुस्लिम ही होंगे, सिर्फ जो पदेन सदस्य हैं, वो किसी भी धर्म के हो सकते हैं। कोर्ट ने तिरुमाला तिरुपति बाला जी का भी जिक्र किया. वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिमों को शामिल किए जाने पर याचिकाकर्ताओं की आपत्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने ये सवाल पूछा है. सीजेआई संजीव खन्ना ने वक्फ सदस्यों को लेकर केंद्र से सवाल करते हुए कहा, कानून के अनुसार 8 सदस्य मुस्लिम होंगे, जबकि 2 मुस्लिम नहीं हो सकते तो बाकी तो गैर-मुस्लिम हुए. सीजेआई संजीव खन्ना ने एसजी मेहता से पूछा कि क्या हिंदुओं की धार्मिक ट्रस्ट के अनुसार गैर-हिंदुओं को बोर्ड में शामिल होने की इजाजत है.
चीफ जस्टिस ने मेहता से नए कानून में 'वक्फ बाय यूजर' प्रावधानों पर ध्यान केंद्रित करने को कहा. CJI ने कहा, 'क्या आप यह कह रहे हैं कि अगर 'वक्फ बाय यूजर' किसी (अदालती) फैसले या किसी और तरीके से स्थापित किया गया था, तो आज यह अमान्य है?' चीफ जस्टिस ने उल्लेख किया कि वक्फ का हिस्सा बनने वाली कई मस्जिदें 13वीं, 14वीं और 15वीं सदी में बनी थीं और उनके लिए दस्तावेज पेश करना असंभव है.
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