खबर न्यू  इंडिया (न्यूज़ डेस्क): जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल और कई बार सांसद रहे सत्यपाल मलिक का मंगलवार दोपहर लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वह कई दिनों से अस्पताल में भर्ती थे और उनका इलाज चल रहा था. सत्यपाल मलिक ने 79 वर्ष की आयु में दिल्ली स्थित राम मनोहर लोहिया अस्पताल में अंतिम सांस ली. आधिकारिक जानकारी के अनुसार सत्यपाल मलिक को किडनी की समस्या थी. उन्होंने कृषि आंदोलन, भ्रष्टाचार और कई राष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी बेबाक राय के लिए सुर्खियां बटोरी थीं. 
24 जुलाई 1946 को जन्मे सत्यपाल मलिक यूपी में बागपत के हिसावदा गांव के मूल निवासी थे, सत्यपाल मलिक ने मेरठ कॉलेज में पढ़ाई के दौरान 1965 में छात्र राजनीति में प्रवेश किया। 1966-67 में मलिक मेरठ कॉलेज के पहले छात्रसंघ अध्यक्ष चुने गए। पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह ने भारतीय क्रांति दल का गठन किया। 1974 के विधानसभा चुनाव में बीकेडी के टिकट पर बागपत सीट से चुनाव लड़ा और विधानसभा पहुंचे। इसके बाद सन् 1980 से 86 और 86-89 के दौरान वह यूपी से ही राज्यसभा गए.
जम्मू-कश्मीर के इतिहास में 23 अगस्त 2018 को सत्यपाल मलिक ने प्रदेश के दसवें और अंतिम राज्यपाल के रूप में पदभार संभाला था। वह इस पद पर नियुक्त होने वाले पहले राजनीतिज्ञ थे। इससे पहले इस संवेदनशील राज्य की कमान हमेशा पूर्व सैन्य अधिकारियों, नौकरशाहों के हाथों में रही थी। सत्यपाल मलिक का कार्यकाल कई ऐतिहासिक फैसलों और बदलावों का साक्षी भी बना। उनके कार्यकाल में ही केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 और 35ए को हटाने का ऐतिहासिक निर्णय हुआ। जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में विभाजित कर दिया गया। इसके साथ ही गवर्नर शासन के दौरान मलिक ने भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद के खिलाफ सख्त कदम उठाए। उन्होंने वर्षों से रुके पंचायत और निकाय चुनाव करवा कर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूती दी। 

#SatyapalMalik #SatyapalMalikDeathNews,