लखनऊ/खबर न्यू  इंडिया (न्यूज़ डेस्क) : अब उत्तर प्रदेश में जाति आधारित रैलियों पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है. इसके साथ ही सार्वजनिक जगहों, पुलिस FIR, अरेस्ट मेमो और सरकारी डॉक्यूमेंट्स में भी किसी की कास्ट नहीं लिखी जाएगी. साथ ही वाहनों पर जाति बताने वाले स्लोगन नहीं लिख सकेंगे. ऐसे वाहनों का चालान किया जाएगा. इसके अलावा सार्वजनिक स्थानों से जाति वाले स्टीकर हटाए जाएंगे. पुलिस रिकॉर्ड, नोटिस बोर्ड और गिरफ्तारी मेमो में भी आरोपी की जाति का जिक्र नहीं किया जाएगा. अब पिता के नाम के साथ-साथ आरोपी की मां का नाम भी दर्ज होगा. सोशल मीडिया पर भी ऐसी सामग्री पर सख्त निगरानी रखी जाएगी, जो जातिगत भेदभाव को बढ़ावा देती हो. सोशल मीडिया पर भी जाति संबंधी पोस्ट या इसे बढ़ावा देने पर कार्रवाई की जाएगी. एससी/एसटी एक्ट जैसे मामलों में जहां कानूनी रूप से जाति का उल्लेख जरूरी है, वहां यह नियम लागू नहीं होगा. सरकार ने सभी संबंधित विभागों को इस आदेश का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं.
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में एक मामले की सुनवाई के दौरान यह व्यवस्था दी थी कि एफआईआर व जब्ती मेमो में जाति नहीं दर्ज की जाएगी. कोर्ट के उसी फैसले के संदर्भ में कार्यवाहक मुख्य सचिव दीपक कुमार ने 21 सितंबर को संबंधित आदेश जारी किया है. योगी सरकार के इस आदेश पर प्रदेश के कार्यवाहक मुख्य सचिव दीपक कुमार ने बताया कि, पिछले कुछ समय से देश में जातिगत भेदभाव को लेकर कई सवाल उठ रहे थे. खासकर पुलिस रिकॉर्ड्स में जाति का उल्लेख सामाजिक समरसता को प्रभावित करता था. इस पृष्ठभूमि में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकार को ऐसे कदम उठाने के लिए कहा था, जिससे जाति आधारित भेदभाव को रोका जा सके. इसी के तहत यह आदेश जारी किया गया है.

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