देहरादून: सिंगल यूज़ प्लास्टिक के बढ़ते प्रयोग को हटाने के लिए ईको फ्रेंडली कपडे पर रिसर्च करेगी डॉ भावना गोयल
देहरादून, खबर न्यू इंडिया (न्यूज़ डेस्क) : पिछले कुछ दशको में पॉलीथिन \ प्लास्टिक आदि से होने वाले प्रदषूण का स्तर काफी तेजी से बढा है, जो की पूरे विश्व के लिए एक चिंताजनक विषय बन गया है, और आने वाले समय में और भी गंभीर होने वाला है कई सारे देशो की सरकारो द्वारा प्लास्टिक प्रदषूण के इस मुद्दे को लेकर कडे फैसले लिए जा रहे है। प्लास्टिक प्रदषूण को नियंत्रित करना मात्र सरकार की ही जिम्मेदारी नहीं है। वास्तव में अकेले सरकार इस विषय में कुछ कर भी नही सकती है। इस समस्या का समाधान तभी संभव है, जब हम सभी इस समस्या को लेकर जागरुक हो और इसे रोकने में अपना योगदान दे। मुमकिन जगहों पर प्लास्टिक के बढते हुए उपयोग को रोककर ही इस भयावह समस्या पर काबू पाया जा सकता है। प्लास्टिक नॉन-बायोडीग्रेडेबल होता है।लकडी और कागज की तरह इसका दहन करके भी हम इसे समाप्त नही कर सकते। प्लास्टिक और पॉललथीन से बना हुआ यह कचरा आसानी से घटित नहीं होता है और कई वषों तक ऐसा ही बना रहता है जिसके कारण इस पर मक्खी मच्छर व अन्य प्रकार के विषाणु जन्म लेते हैं व रोगों का कारण बनते हैं। इसी प्लास्टिक के कचरे को खाने से जानवरों की मौत भी हो जाती है। प्लास्टिक का कचरा जब लैंडफिल या पानी के स्रोतों में पहुंच जाता है, तब यह एक गंभीर संकट बन जाता है।
इस प्रकार वर्तमान समय की इस विशेष चुनौती के समाधान को स्वीकार करते हुए पोस्टडॉक्टरल वूमेन साइंटिस्ट (यूजीसी) व सचिव उन्नति महिला उद्यमिता एवं प्रशिक्षण समिति देहरादनू , डॉ भावना गोयल अब भारत सरकार, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के इक्विटी एम्पावरमेंट एंड डेवलपमेंट (SEED) डिवीज़न की पररयोजना के तहत एक बायोडीग्रेडेबल व इको फ्रेंडली कपडे को बनाने पर शोध करेंगी । जिस से बने मूल्य वर्धित उत्पादों का उन जगहों पर प्रयोगकिया जाएगा जहां पर हम रोजमर्रा के प्रयोग में पॉलीथिन और प्लास्टिक प्रयोग में लाते हैं। इस पररयोजना का मुख्य उद्देश्य बुननयादी अनुसन्धान द्वारा वातावरण का प्रदषूण को कम कर दूरदराज और कटिन इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए स्थाई रोजगार का साधन स्थापित करके समाज के हर वर्ग का सम्पूर्ण विकास करना है। उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य जहां पर बडे-बडे कल कारखाने स्थापित नहीं हो सकते,वहां इस परियोजना के अनुसंधान के लाभ से वातावरण का प्रदषूण को कम करने के साथ-साथ दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को उन्हीं के स्थानों पर रोजगार मिलेगा वह पहाडों से पलायन भी रुकेगा। डॉ भावना गोयल पवगत कई वषों से भारत सरकार की विभिन्न पररयोजनाओं के माध्यम से भारतीय संस्कृति के संरक्षण, संवर्धन, विस्तार एवं भारत के परंपरागत रोजगारो को बढावा देकर महिलाओं के शसक्तिकरण के लिए बहुमूल्य योगदान दे रही हैं।






