भारत ने वैश्विक खाद्य असुरक्षा पर चिंता व्यक्त की
(न्यूज़ डेस्क) : भारत ने अनाज की कीमतों में ‘‘अनुचित वृद्धि’’ के बीच उसकी जमाखोरी और वितरण में भेदभाव पर चिंता व्यक्त की है. बुधवार को पश्चिमी देशों से आह्वान किया है कि अनाज का बंटवारा कोविड-19 रोधी टीकों की तरह नहीं होना चाहिए. उसने कहा कि गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने के उसके फैसले से यह सुनिश्चित होगा कि वह जरूरतमंद लोगों की जरूरतों को पूरा कर सकता है. केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री वी मुरलीधरन ने न्यूयार्क में 'वैश्विक खाद्य सुरक्षा-काल टू एक्शन' पर उच्च स्तरीय बैठक में कहा कि कोविड वैक्सीन की तरह गेहूं की किल्लत न हो. इससे खाद्य कीमतों में "अनुचित वृद्धि" के बीच जमाखोरी हो सकती है. अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री वी मुरलीधरन ने वैश्विक खाद्य असुरक्षा पर चिंता व्यक्त की. उन्होंने कहा कि "कई कम आय वाले समाज आज बढ़ती लागत और खाद्यान्न तक पहुंच में कठिनाई की दोहरी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं. यहां तक कि भारत जैसे लोगों के पास, जिनके पास पर्याप्त स्टॉक है, उन्होंने भी खाद्य कीमतों में अनुचित वृद्धि देखी है. साफ है कि जमाखोरी, कयासबाजी का काम चल रहा है. हम इसे बिना किसी चुनौती के पारित नहीं होने दे सकते.






