एक बडे आंदोलन के लिये तैयार रहे किसान: राकेश टिकैत
मुजफ्फरनगर,खबर न्यू इंडिया (न्यूज़ डेस्क)। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि देश का किसान अपने ट्रैक्टरों को तैयार रखें कभी-भी एक बड़े आन्दोलन की जरूरत पड़ सकती है। भारतीय किसान यूनियन ने अपनी मांगों को लेकर देश के प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले जिला व तहसील मुख्यालयों पर धरना-प्रदर्शन किया गया। राकेश टिकैत ने रोहाना टोल प्लाजा स्थित धरने पर पहुंचकर अपनी बात किसानों के बीच रखी। राकेश टिकैत ने कहा कि भारतीय किसान यूनियन पिछले 36 सालों से देश-दुनिया के खेती-किसानी के मुद्दों पर आंदोलनरत है। मौजूदा दौर में देश की डांवाडोल आर्थिक हालात को केवल कृषि ने ही अपने दम पर संबल देने का काम किया है। यह किसी भी कृषि प्रधान देश के लिए गर्व की बात है, लेकिन मौजूदा समय में किसान घाटे में जाती खेती की वजह से संकट का सामना कर रहा है। उसकी खेती से आय लगातार घट रही है और इसकी वजह से वह शहरों की ओर पलायन करने को मजबूर है। सरकारी नीतियों को लागू न करने से वह खुद को ठगा सा महसूस कर रहा है। उन्होंने किसानों का आह्वान किया कि एक बडे आंदोलन के लिये तैयार रहे और अपने ट्रैक्टरों को भी तैयार रखें।
संयुक्त किसान मोर्चे के आव्हान पर भाकियू कार्यकर्ताओं ने हाईवे स्थित भैंसी कट के पास धरना देकर किसानों की मांगों के संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम का ज्ञापन एसडीएम जीत सिंह रॉय को सौंपा। धरने को सम्बोधित करने पहुंचे भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार की गलत नीतियों का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। सेना में भर्ती की नई योजना अग्निपथ युवाओं का भविष्य खराब करने वाली है।
भाकियू राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कार्यकर्ताओं से संगठन को मजबूत बनाने का आव्हान करते हुए कहा कि गांव दर गांव आरएसएस लॉबी अपनी घुसपैठ बनाकर किसानों को बरगलाने का काम कर रही है। इससे किसानों को सावधान रहने की आवश्यकता है। इस अवसर पर राकेश टिकैत ने एमएसपी गारंटी कानून बनाने के साथ ही रंगनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने की मांग सरकार से की। इसके अलावा धरनारत भाकियू कार्यकर्ताओं ने किसानों की मांगों वाला ज्ञापन एसडीएम जीत सिंह रॉय को सौंपा, जिसमें कहा गया है कि देश का किसान खेती किसानी के मुद्दों पर आंदोलनरत है। मौजूदा दौर में देश को केवल कृषि ने ही अपने दम पर संबल देने का काम किया है। यह किसी देश के लिए गर्व की बात है, लेकिन मौजूदा समय में किसान समस्याओं का सामना कर रहा है। उसकी खेती से आय लगातार घट रही है, जिसके चलते किसान गांव से शहर की और पलायन करने को मजबूर है। एमएसपी गारंटी कानून बनाने के मामले में केंद्र सरकार की ओर से ऐसी कमेटी बनाई गई है, जिस पर संयुक्त मोर्चे को विश्वास ही नहीं है। कमेटी में उन नौकरशाही और किसान संगठनों के प्रतिनिधियों को अधिक स्थान दिया गया है। रंगनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू किया जाए। किसानों के बेटों को पुलिस, अर्धसैनिक बलों की भर्ती में प्राथमिकता दी जाए। किसानों की अधिग्रहित की गई भूमि का उचित मुआवजा देने के साथ ही किसानों को बिजली मुफ्त देने की दिशा में प्रयास किए जाए। बिजली पर निर्भरता कम करने हेतु किसानों को सोलर एनर्जी पर रूफ टॉप सब्सिडी दी जाए। प्राइवेट और कमर्शियल वाहनों को चाहे वह किसान के ही क्यों न हो, अलग-अलग विभाजित कर किलोमीटर के हिसाब से उनकी मियाद की गारंटी को निर्धारित किया जाए। धरना देने वालों में सैकड़ों भाकियू कार्यकर्ता शामिल रहे।







