देहरादून, खबर न्यू इंडिया (न्यूज़ डेस्क): श्रीमद् भागवत कथा के षष्टम दिवस की कथा में कथा व्यास आचार्य श्री भारत भूषण गैरोला शास्त्री जी ने अपनी दिव्य रस मयी वाणी से सभी श्रोताओं को आनंदित किया आचार्य श्री ने दिव्य रासलीला का  वर्णन करते हुए बताया कि भगवान ने अपने अन्य अवतारों में सभी राक्षस कन्याओ, नागकन्याओ, असुरकन्याओं, मत्स्यकन्याओ, सभी को बृज की गोपियां बनने का निमंत्रण दिया समस्त वेदों के मंत्र आज बृज की गोपियां बनी है मेरे गोविंद ने राधा रानी सहित सभी गोपियों के साथ रास बिहार करके सभी की अभिलाषा पूरी की भगवान की रासलीला में कामदेव आए और अपने पांचों बाण चलाने लगे मेरे परमात्मा ने कामदेव का अभिमान खत्म किया और असंख्य गोपियों के साथ रास रचने पर भी मेरे भगवान सात्विक ब्रह्मचारी ही रहे,। तदोपरांत भगवान का मथुरा जाना मां यशोदा का बिरह गोपियों का बिरह सुनकर सभी की आंखें नम हुई व्यास जी ने बताया कि भगवान् ने कंस का संहार करके महाराज उग्रसेन को मथुरा का राजा बना कर मेरे भगवान ने अल्पकाल में सभी विद्याओं का ज्ञान लिया, गुरु के मृत पुत्र को जीवित किया पुज्य व्यास ने बताया कि जो हमारी संस्कृति है मर चुकी है वही गुरु पुत्र है भगवान उसी संस्कार और संस्कृति के लिए गुरु दक्षिणा चुकाई तदोपरांत रुकमणी विवाह का सभी ने लिया आचार्य श्री वीरेंद्र कोठारी जी व आचार्य अशीष कोठारी जी ने अपने दिव्य मंत्रों से विवाह कार्य पूर्ण किया साथ ही संगीतज्ञ बृजमोहन रतूड़ी, अरविंद पैन्यूली, राजेश पैन्यूली, अपने दिव्य भजनों से सभी को आनंदित किया।      

आयोजक श्रीमती कुमला देवी सभी श्रोताओं का आभार एवं स्वागत करने लगे यज्ञ में राजेंद्र नेगी, नरेंद्र नेगी, सतेंद्र सिंह नेगी, भूपेंद्र सिंह बिष्ट, श्रीमती उर्मिला बिष्ट, श्रीमती सरस्वती नेगी, कविता, रजिनी नेगी बलवीर नेगी, आशिमा नेगी, अक्षत बिष्ट, आयुष बिष्ट, देवेश्वरी, राधा बिष्ट, प्रभा जुयाल, शांति रावत, सुंदरी पेटवाल, योजना भाटिया, अंजू भाटिया, मकानी देवी, आनंद मोहन, दीपाली, आदि प्रबुद्ध श्रोताओं ने भगवान की दिव्य कथा को श्रवण करके पुण्य प्राप्त किया