खबर न्यू इंडिया (न्यूज़ डेस्क): कई दिनों से मध्य प्रदेश के बागेश्वर धाम के कथा वाचक पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री बहुत चर्चाओं में हैं। ये चर्चा नागपुर से शुरू हुई, जब पं. धीरेंद्र शास्त्री पर अंधविश्वास फैलाने का आरोप लगा। अंध श्रद्धा निर्मूलन समिति ने कहा कि जब बागेश्चर धाम सरकार को चमत्कार साबित करने के लिए चुनौती दी गई है तो कथा बीच में ही छोड़कर वह चले गए। नागपुर विवाद पर पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने कहा, "सनातनी व्यक्ति भागता नहीं है. कथा 7 दिन की थी. हमारे पास स्क्रीनशॉट हैं. उनके ऊपर मानहानि बनती है, लेकिन हम प्रपंची नहीं है. उन्होंने आने के बाद चैलेंज दिया. 11 तारीख तक कथा थी, कथा के बाद चले आए. दरबार दो दिन तक लगा, उन्हें आना चाहिए था. अनुभव करना चाहिए था, देखना चाहिए था. मीडिया से बात करते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने कहा, 'मैं किसी से नहीं डरता, हिंदू शेर है भगोड़े नहीं हैं।' इतना ही नहीं उन्होंने यह भी कहा कि यहां तो लोगों ने भगवान राम को नहीं छोड़ा है उनपर भी सवाल उठाए हैं। भगवान राम से उनके होने के लिए सबूत मांगा गया है। हम तो आम इंसान हैं, हमें कब छोड़ेंगे।

उन्होंने कहा, "जब से हमने घर-वापसी कराई, तभी हमने कह दिया था कि मेरे ऊपर आरोप लगने वाले हैं. ये आग सनातन की बुझने मत देना. गुरु कृपा से हमें आभास है. भय होता तो चुप हो जाते, लेकिन आभास है. जो आरोप लगे. गुरु प्रेरणा हमें बता रही है कि बहुत जल्दी लोग हमें रास्ते से हटाने का काम करेंगे." उन्होंने आगे कहा, "हमारे साथ 100 करोड़ हिंदू और बागेश्वर बालाजी का आशीर्वाद है. हम कभी कानून का उल्लंघन नहीं करते. सरकार ने व्यवस्था भी दी." पं. धीरेंद्र शास्त्री कहते हैं कि वह किसी तरह का कोई चमत्कार नहीं करते हैं। वह तो सिर्फ बालाजी हनुमानजी के सामने लोगों की अर्जियां लगाते हैं। जिसे बालाजी स्वीकार कर लेते हैं। इससे आम लोगों को फायदा होता है। अंधविश्वास का विवाद सामने आने के बाद भी पं. धीरेंद्र शास्त्री ने सफाई पेश की। उन्होंने कहा कि वह अपने दरबार में किसी को बुलाते नहीं हैं। लोग खुद की मर्जी से आते हैं। वह तो सिर्फ लोगों की अर्जियों को भगवान के सामने रखते हैं। बाकी सबकुछ भगवान की तरफ से ही होता है।

धीरेंद्र शास्त्री को लेकर कहा जाता है कि वह लोगों की मन की बात को पढ़ लेते हैं। इतना ही नहीं शास्त्री दरबार में आए व्यक्ति का मोबाइल नंबर और घर में रखी चीजों के बारे में भी बता देते हैं। अंध श्रद्धा निर्मूलन समिति ने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को उनकी शक्तियां सबके सामने साबित करने की चुनौती दी थी। इस मामले पर देशभर में हंगामा मचा हुआ है।

विवाद क्या है?
बागेश्वर धाम सरकार पं. धीरेंद्र शास्त्री की कथा के दौरान लोगों की समस्याएं सुनने और उसका समाधान करने का दावा किया जाता है। कहा जाता है कि भूत, प्रेत से लेकर बीमारी तक का इलाज बाबा की कथा में होता है। बाबा के समर्थक दावा करते हैं कि बागेश्वर धाम सरकार इंसान को देखते ही उसकी हर तरह की परेशानी जान लेते हैं और उसका समाधान करते हैं। वहीं, बागेश्वर धाम सरकार का कहना है कि वह लोगों की अर्जियां भगवान (बालाजी हनुमान) तक पहुंचाने का जरिया मात्र हैं। जिन्हें भगवान सुनकर समाधान देते हैं। इन्हीं दावों को नगापुर की अंध श्रद्धा निर्मूलन समिति ने चुनौती दी। यहीं से विवाद की शुरुआत हुई।  

क्या है बागेश्वर धाम का इतिहास?
छतरपुर के पास एक जगह है गढ़ा। यहीं पर बागेश्वर धाम है। यहां बालाजी हनुमान जी का मंदिर है। हर मंगलवार को बालाजी हनुमान जी के दर्शन को भारी भीड़ उमड़ती है। धीरे-धीरे इस दरबार को लोग बागेश्वर धाम सरकार के नाम से पुकारने लगे। ये मंदिर सैकड़ों साल पुराना बताया जाता है।  1986 में इस मंदिर का रेनोवेशन कराया गया था। 1987 के आसपास यहां एक संत बब्बा जी सेतु लाल जी महाराज आए। इनको भगवान दास जी महाराज के नाम से भी जाना जाता था। धाम के मौजूदा प्रमुख पं. धीरेंद्र शास्त्री भगवान दास जी महाराज के ही पौत्र हैं। अभी बागेश्वर धाम की बागडोर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के पास है। पं. धीरेंद्र का जन्म 1996 में छतरपुर (मध्य प्रदेश) जिले के गड़ागंज गांव में हुआ था। इनका पूरा परिवार अभी भी गड़ागंज में ही रहता है। पं. धीरेंद्र शास्त्री के दादा पं. भगवान दास गर्ग भी इस मंदिर के पुजारी रहे। कहा जाता है कि पं. धीरेंद्र का बचपन काफी कठिनाई में बीता। जब वह छोटे थे तो परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी खराब थी कि एक वक्त का ही भोजन मिल पाता था। 

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