लखनऊ,खबर न्यू इंडिया (न्यूज़ डेस्क): सीएम योगी आदित्यनाथ से राष्ट्रीय लोकदल के नौ में से आठ विधायकों ने मुलाकात की। ऐसा पहली बार हुआ है जब रालोद विधायक एक साथ सीएम से मिले हैं। वही इस मुलाकात के बाद यूपी के सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गयी हैं, हालांकि रालोद विधायकों का कहना है की वे प्रदेश के किसानों का बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान करने, गन्ना मूल्य में वृद्धि करने, किसानों को फ्री बिजली देने जैसे मामलों पर सीएम से मिले थे। जयंत चौधरी की पार्टी आरएलडी का पश्चिमी यूपी में अच्छा-खासा जनाधार है. 2022 के यूपी चुनाव में आरएलडी को 2.85% वोट मिले थे. जानकारों का कहना है कि इंडिया के छोटे दलों को साधकर बीजेपी विपक्षी मोर्चे के अंकगणित को सियासी केमेस्ट्री से कमजोर करना चाहती है. कहा जा रहा है कि राज्यसभा में दिल्ली बिल पर हुई वोटिंग में पहले रालोद प्रमुख जयंत चौधरी गायब रहे। सियासी गलियारों में पहले ही जयंत के बीजेपी के साथ जाने की अटकलें चल रही हैं। ऐसे में जयंत वोटिंग में नहीं पहुंचे तो इन अटकलों को और बल मिलने लगा। चर्चा है कि जयंत भाजपा आलाकमान के संपर्क में हैं।  जयंत की गैर-मौजूदगी का उनकी पार्टी आरएलडी बचाव कर रही है. आरएलडी का कहना है कि जयंत पारिवारिक वजहों से सदन में मौजूद नहीं थे. हालांकि, जयंत की ओर से इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.

जयंत चौधरी को सियासत दादा चौधरी चरण सिंह और पिता अजित सिंह से विरासत में मिली है. पश्चिमी यूपी जाट बहुल इलाका है, इसलिए इसे जाटलैंड भी कहा जाता है. जाट के अलावा यहां गुर्जर, मुसलमान, राजपूत और अहीर मतदाताओं का भी दबदबा है. पश्चिमी यूपी में जाट करीब 18 प्रतिशत है, जो 10-12 सीटों पर सीधा असर डालते हैं. आंकड़ों की बात की जाए तो मथुरा में 40%, बागपत में 30%, मेरठ में 26% और सहारनपुर में 20% जाट हैं, जो किसी भी समीकरण को उलट-पलट सकते हैं. जयंत चौधरी के एनडीए के साथ जाने की अटकलों के पीछे एक वजह समाजवादी पार्टी से सीट शेयरिंग भी है. सूत्रों के मुताबिक आरएलडी पश्चिमी यूपी में कम से कम 10 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है. आरएलडी इसकी पूरी तैयारी कर चुकी है. सपा 5 से ज्यादा सीट देने को तैयार नहीं है. 

 

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