देहरादून, खबर न्यू इंडिया (न्यूज़ डेस्क): देवभूमि उत्तराखंड ने इतिहास रच दिया हैं,  उत्तराखंड विधानसभा में समान नागरिक संहिता विधेयक ध्वनिमत से पारित हो गया है. इसके साथ ही मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नाम ये ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज हो गयी हैं। देवभूमि उत्तराखंड देश में यूसीसी कानून लाने वाला पहला राज्य बन गया हैं ।

ऐतिहासिक समान नागरिक संहिता विधेयक-2024 विधानसभा में पारित..

इसके बाद सीएम धामी ने प्रेसवार्ता में कहा कि आज उत्तराखंड के लिए विशेष दिन है। माँ गंगा व यमुना की उद्गम स्थली देवभूमि उत्तराखण्ड से निकली UCC के रूप में समानता और समरूपता की यह अविरल धारा संपूर्ण देश का पथ प्रदर्शित करेगी। यह विधेयक मातृशक्ति के सम्मान एवं उनकी सुरक्षा के प्रति हमारी सरकार की प्रतिबद्धता को भी परिलक्षित करता है। सीएम धामी ने कहा की आज पुनः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुखारबिंद से निकली वह शिववाणी याद आती है कि '21वीं सदी का तीसरा दशक उत्तराखण्ड का दशक है’ प्रधानमंत्री जी के विजन 'एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ एवं प्रदेशवासियों की आकांक्षाओं के अनुरूप हमारी सरकार ने चुनाव से पूर्व देवतुल्य जनता से किए गए अपने वादे को पूर्ण किया है।

सीएम धामी ने कहा की आज 24 साल के सशक्त, स्वाभिमानी एवं ऊर्जावान उत्तराखण्ड को देखकर हमारे राज्य आंदोलनकारियों का मस्तक गर्व से ऊँचा हो गया होगा। हमारे शहीदों के प्रति यह एक सच्ची श्रद्धांजलि है जब हमारा प्रदेश विश्व पटल पर एक नई पहचान बना रहा है। इतिहास रचने वाली उत्तराखण्ड की विधायिका के सभी माननीय सदस्यों, UCC का ड्राफ्ट बनाने वाली कमेटी के सभी सदस्यगणों एवं अपना बहुमूल्य समर्थन देने वाली देवभूमि की जनता का कोटि-कोटि  आभार।

जाति, धर्म व पंथ के रीति-रिवाजों से छेड़छाड़ नहीं

विधेयक में शादी, तलाक, विरासत और गोद लेने से जुड़े मामलों को ही शामिल किया गया है। इन विषयों, खासतौर पर विवाह प्रक्रिया को लेकर जो प्राविधान बनाए गए हैं उनमें जाति, धर्म अथवा पंथ की परंपराओं और रीति रिवाजों से कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है। वैवाहिक प्रक्रिया में धार्मिक मान्यताओं पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। धार्मिक रीति-रिवाज जस के तस रहेंगे। ऐसा भी नहीं है कि शादी पंडित या मौलवी नहीं कराएंगे। खान-पान, पूजा-इबादत, वेश-भूषा पर भी कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

शादी का पंजीकरण कराना अनिवार्य

- विधेयक में 26 मार्च वर्ष 2010 के बाद से हर दंपती के लिए तलाक व शादी का पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा।
- ग्राम पंचायत, नगर पंचायत, नगर पालिका, नगर निगम, महानगर पालिका स्तर पर पंजीकरण का प्रावधान।
- पंजीकरण न कराने पर अधिकतम 25 हजार रुपये का अर्थदंड का प्रावधान।
- पंजीकरण नहीं कराने वाले सरकारी सुविधाओं के लाभ से भी वंचित रहेंगे।
- विवाह के लिए लड़के की न्यूनतम आयु 21 और लड़की की 18 वर्ष तय की गई है।
- महिलाएं भी पुरुषों के समान कारणों और अधिकारों को तलाक का आधार बना सकती हैं।
- हलाला और इद्दत जैसी प्रथाओं को समाप्त किया गया है। महिला का दोबारा विवाह करने की किसी भी तरह की शर्तों पर रोक होगी।
- कोई बिना सहमति के धर्म परिवर्तन करता है तो दूसरे व्यक्ति को उस व्यक्ति से तलाक लेने व गुजारा भत्ता लेने का अधिकार होगा।
- एक पति और पत्नी के जीवित होने पर दूसरा विवाह करना पूरी तरह से प्रतिबंधित होगा।
- पति-पत्नी के तलाक या घरेलू झगड़े के समय पांच वर्ष तक के बच्चे की कस्टडी उसकी माता के पास रहेगी।

संपत्ति में बराबरी का अधिकार

- संपत्ति में बेटा और बेटी को बराबर अधिकार होंगे।
- जायज और नाजायज बच्चों में कोई भेद नहीं होगा।
- नाजायज बच्चों को भी उस दंपती की जैविक संतान माना जाएगा।
- गोद लिए, सरगोसी के द्वारा असिस्टेड री प्रोडेक्टिव टेक्नोलॉजी से जन्मे बच्चे जैविक संतान होंगे।
- किसी महिला के गर्भ में पल रहे बच्चे के संपत्ति में अधिकार संरक्षित रहेंगे।
- कोई व्यक्ति किसी भी व्यक्ति को वसीयत से अपनी संपत्ति दे सकता है।

लिव इन रिलेशनशिप का पंजीकरण कराना अनिवार्य

- लिव इन में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति के लिए वेब पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य होगा।
- युगल पंजीकरण रसीद से ही किराया पर घर, हॉस्टल या पीजी ले सकेंगे।
- लिव इन में पैदा होने वाले बच्चों को जायज संतान माना जाएगा और जैविक संतान के सभी अधिकार मिलेंगे।
- लिव इन में रहने वालों के लिए संबंध विच्छेद का भी पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा।
- अनिवार्य पंजीकरण न कराने पर छह माह के कारावास या 25 हजार जुर्माना या दोनों का प्रावधान होंगे।

गोद लेने का कोई कानून नहीं

समान नागरिक संहिता में गोद लेने के लिए कोई कानून नहीं बनाया गया है।

यूसीसी बिल पास होने के बाद अब इसे राज्यपाल के पास भेजा जाएगा. राज्यपाल के दस्तखत होते ही ये कानून बन जाएगा. इससे राज्य के सभी लोगों पर समान कानून लागू हो जाएंगे. हालांकि, अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लोगों पर इसके प्रावधान लागू नहीं होंगे.  

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