रामपुर तिराहा कांड में दोषी 2 पुलिसकर्मियों को आजीवन कारावास की सजा
मुजफ्फरनगर,खबर न्यू इंडिया (न्यूज़ डेस्क): मुजफ्फरनगर के चर्चित रामपुर तिराहा कांड में दोषी 2 पुलिसकर्मियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है और दोनों पर 25-25 हजार रुपए का जुर्माना भी किया गया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायालय संख्या-7 के पीठासीन अधिकारी शक्ति सिंह ने सजा सुनाई है। शासकीय अधिवक्ता फौजदारी राजीव शर्मा, सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी परवेंद्र सिंह और उत्तराखंड संघर्ष समिति के अधिवक्ता अनुराग वर्मा ने बताया कि मिलाप सिंह की पत्रावली में प्रकरण में फैसले पर कोर्ट ने दोनों सिपाहियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दुष्कर्म के मामले में अभियुक्त पीएसी के सिपाही मिलाप सिंह और वीरेंद्र प्रताप पर दोष सिद्ध किया। पीएसी गाजियाबाद में सिपाही मिलाप सिंह मूल रूप एटा के निधौली कलां थाना क्षेत्र के होर्ची गांव का रहने वाला है। दूसरा आरोपी सिपाही वीरेंद्र प्रताप मूल रूप सिद्धार्थनगर के गांव गौरी का रहने वाला है।
अलग उत्तराखंड राज्य आंदोलन की मांग ने 1 अक्टूबर 1994 को बड़ा रूप ले लिया था. एक अक्टूबर की रात काफी संख्या में उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी बसों में भरकर देहरादून से दिल्ली की तरफ कूच करने लगे थे. लेकिन तत्कालीन यूपी सरकार के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के आदेश पर पुलिसकर्मियों ने राज्य आंदोलनकारियों को मुजफ्फनगर के रामपुर तिराहे पर रोकने का प्रयास किया. लेकिन उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी दिल्ली जाने की जिद पर अड़े रहे. दो अक्टूबर के तड़के करीब तीन बजे के आसपास माहौल पूरी तरह के तनावपूर्ण हो गया. आखिर में यूपी पुलिस ने उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों को रोकने के लिए लाठीचार्ज किया. आरोप है कि इस दौरान पुलिस ने फायरिंग भी की, जिसमें 7 राज्य आंदोलनकारियों की मौत हो गई थी. आरोप है कि इस दौरान कई महिलाओं के साथ दरिंदगी की घटना को भी अंजाम दिया गया. इस कांड दो दर्जन से अधिक पुलिसकर्मियों पर रेप, हत्या, छेड़छाड़ और डकैती जैसे कई मामले दर्ज हैं. 25 जनवरी 1995 को सीबीआई ने पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमें दर्ज किए थे। सीबीआई ने मामले की जांच की और पुलिसकर्मियों और अधिकारियों पर मुकदमे दर्ज कराए थे।
वही उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने फ़ैसले पर ख़ुशी जताते हुआ कहा की माननीय न्यायालय ने राज्य आंदोलन के दौरान हुए रामपुर तिराहा कांड में दोषी पाए गए पीएससी के दो सिपाहियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है, साथ ही दोनों पर 50-50 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। "इस फैसले के आने से लंबे समय से न्याय का इंतजार कर रहे पीड़ितों एवं उनके परिवारजनों को बड़ी राहत मिली है। हमारी सरकार पूर्ण कर्तव्यनिष्ठा के साथ राज्य आंदोलनकारियों की आशाओं और आकांक्षाओं को पूर्ण करने हेतु कार्य कर रही है।
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