मुज़फ्फरनगर/खबर न्यू इंडिया (न्यूज़ डेस्क): यूपी में मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट से सपा गठबंधन प्रत्याशी हरेन्द्र मलिक ने लगातार दो बार के सांसद व केंद्रीय राज्यमंत्री डा. संजीव बालियान को 25 हजार से ज्यादा मतों से हराकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। हरेन्द्र मलिक ने ऐतिहासिक जीत पर मुजफ्फरनगर की जनता का आभार जताया है। मंडी समिति में जिलाधिकारी से जीत का प्रमाण पत्र लेने के बाद हरेन्द्र मलिक सबसे पहले महावीर चौक स्थित सपा कार्यालय पहुंचे और फर चौधरी राकेश टिकैत से उनके आवास पर मिले, इसके बाद वह शिव चौक पर पहुंचकर भगवान शिव का आशीर्वाद लिया। भाजपा-रालोद गठबंधन के बाद भाजपा प्रत्याशी डॉ संजीव बालियान की स्थिति को मजबूत माना जा रहा था, लेकिन नतीजे उलट आए। लोकसभा चुनाव में सरधना, खतौली और चरथावल विधानसभा में भाजपा का विरोध शुरू हुआ। इस दौरान भाजपा बिखरी नजर आई। डॉ. संजीव बालियान भी कई मौके पर अकेले खड़े नजर आए।
सपा प्रत्याशी हरेन्द्र मलिक को कुल 469804 मत प्राप्त हुए, जबकि भाजपा प्रत्याशी संजीव बालियान को 443815 मत प्राप्त हुए। इस प्रकार सपा प्रत्याशी हरेन्द्र मलिक 25989 मतों से विजयी रहे। बसपा प्रत्याशी दारा सिंह प्रजापति 143323 मत पाकर तीसरे स्थान पर रहे। निर्दलीय प्रत्याशी कविता 1970, सुनील कुमार 858, बीरबल सिंह 1419, अंकुर 362, मनुज शर्मा 333, रेशू शर्मा 679, शशिकांत शर्मा 1429 व सुनील त्यागी 7131 मत लेने में कामयाब रहे, जबकि 3884 मतदाता ऐसे भी थे, जिन्होंने किसी भी प्रत्याशी को  पसंद नहीं किया और नोटा का बटन दबाया।
भाजपा की हार का सबसे बड़ा कारण बसपा प्रत्याशी दारा सिंह प्रजापति रहे। प्रजापति को दलित वोट तो अधिक संख्या में मिले, साथ ही उन्होंने प्रजापति के साथ ही अन्य अति पिछड़ी जातियों में सेंधमारी की। 2019 में सैनी, कश्यप, पाल का वोट भाजपा को अधिक मिला था, लेकिन इस बार वोट कम मिला। सदर सीट पर अति पिछड़ा वर्ग में बिखराव का लाभ सपा प्रत्याशी हरेंद्र मलिक को मिला। 2022 के विधानसभा चुनाव के नतीजों का असर भी लोकसभा के नतीजों पर पड़ा। भाजपा ने जिले की पांच सीटें गंवा दी थी। खतौली उप चुनाव में भी भाजपा को हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद से भाजपा में बिखराव होने लगा। इस बार राजपूतों में शुरू से ही नाराजगी रही। त्यागी समाज के लोग भी विरोध में खड़े दिखाई दिए। गुर्जर समाज के गांवों में भी बिखराव नजर आया। वोट प्रतिशत कम होने के चलते भी भाजपा को नुकसान हुआ। मुजफ्फरनगर से लगातार तीसरी बार भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे केंद्रीय मंत्री डा. संजीव बालियान को सरधना से भाजपा के पूर्व विधायक संगीत सोम ने खुलकर चुनौती दी और प्रदेश इकाई के हस्तक्षेप के बावजूद सोम ने डा. बालियान को हराने की पूरी पटकथा लिख दी। 16 अप्रैल को मेरठ के सरधना में और बाद में सिसौली समेत कई स्थानों पर क्षत्रियों ने विरोध में सम्मेलन किए। बाद में सीएम योगी आदित्यनाथ एवं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने क्षत्रियों को साधने का प्रयास किया, लेकिन तब तक तीर कमान से निकल चुका था। इसका असर पूर्वांचल तक देखा गया। मुजफ्फरनगर, मेरठ, कैराना, सहारनपुर और नगीना में भाजपा की हार की यह भी एक वजह रही। भाजपा ने पहली बार पश्चिम क्षेत्र का अध्यक्ष क्षत्रिय चेहरे के रूप में सतेंद्र शिशौदिया को बनाया, लेकिन वह आक्रोशित ठाकुरों को संभाल नहीं सके और न ही भाजपा से जोड़ पाए। किसान मजदूर संघ के अध्यक्ष ठाकुर पूरन सिंह ने सात अप्रैल को सहारनपुर के ननौता में क्षत्रिय स्वाभिमान सम्मेलन किया, जिसमें भारी भीड़ पहुंचने के बावजूद भाजपा ने इसे हल्के में लिया।
 

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