मुज़फ्फरनगर/खबर न्यू इंडिया (न्यूज़ डेस्क): मुजफ्फरनगर में संजीव बालियान ने अपनी हार को लेकर बड़ा बयान दिया है. पूर्व केन्द्रीय मंत्री डा. संजीव बालियान ने लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद सोमवार को पहली बार मीडिया से रूबरू होकर अपनी बात रखी। लोकसभा चुनाव में डा. संजीव बालियान की हार से भाजपा समर्थक निराश हैं। हार के कारणों की समीक्षा चल रही है। खास बात यह भी है कि बालियान ने अपने प्रभाव से जिन्हें संगठन समेत विभिन्न पद दिलाए और जिताए, डा. संजीव बालियान 10 साल सांसद रहने के साथ ही केंद्र में मंत्री रहे। सरकूलर रोड स्थित एक होटल में डा. संजीव बालियान ने प्रेसवार्ता में अपनी बात रखी। उन्होंने अपने 10 सालों में किए गए विकास कार्यों की जानकारी देते हुए बताया कि हार का कारण मुस्लिम ध्रुवीकरण, जातियों में बंटवारा और कम वोट परसेंटेज करना था। संजीव बालियान ने शायराना अंदाज में कहा कि मेरा पानी उतरता देख किनारे पर घर मत बना लेना, मैं समंदर हूं लौट कर आऊंगा।

संजीव बालियान ने हार के लिये कुछ जयचंदों को जिम्मेदार ठहराया, जो खुलेआम दूसरे दल के नेता को चुनाव लड़वा रहे थे, ऐसे लोगों के खिलाफ पार्टी हाईकमान से कार्यवाही की गुहार भी लगाई है। उन्होंने कहा कि इस हार से मेरा तो बंगला-गाडी ही गई है, लेकिन जनपद की जनता ने अपना बहुत बड़ा नुकसान कर लिया, जो विकास का पहिया चल रहा था, वह रूक जायेगा। खासकर मेरठ से मुजफ्फरनगर तक रीजनल रेल चलाने के प्रयासों को तगड़ा झटका लगा है। डॉ. संजीव बालियान ने हार का सबसे पहला कारण लोकसभा क्षेत्र में मुस्लिम मतदाताओं का ध्रुवीकरण बताया। दूसरा प्रमुख कारण हिंदू मतदाताओं का जातियों में बंट जाना। उन्होंने कहा कि उनके चुनाव में उनके समर्थक मतदाता जातियों में बटते नजर आए। हिंदू मतदाताओं का मत प्रतिशत की अपेक्षा अनुरूप नहीं रहा। वहीं प्रतिद्वंदी प्रत्याशी के हक में मुस्लिम समाज के मतदाताओं का अधिक तादात में मतदान करना भी उनकी हार का कारण बना।

डॉ. संजीव बालियान ने सरधना से पूर्व विधायक संगीत सोम पर आरोप लगाते हुए कहा कि संगीत सोम ही सपा प्रत्याशी हरेंद्र मलिक को चुनाव लडवा रहे थे, लोकसभा चुनाव में पराजय के बाद डॉक्टर संजीव बालियान  ने सांसद हरेंद्र मलिक, उनके पुत्र चरथावल से विधायक पंकज मलिक पर तंज कसते हुए कहा कि मेरी आलोचना न करें, विकास कार्यों पर ध्यान दें, उन्होंने मुजफ्फरनगर लोकसभा में सपा से जीते हरेंद्र मलिक को बधाई दी। उन्होंने कहा कि उन्हें भरपूर प्यार मिला है, अब भी वे जनता के बीच में रहकर काम करते रहेंगे। संजीव बालियान ने कहा कि मुस्लिम समाज द्वारा ज्यादा वोटिंग और हिंदू समाज से कम वोटिंग मेरी हार का कारण रहा। मेरे चुनाव में जिसने जितनी मेहनत की, उसको आगे आने वाले टाइम में उतना ही प्रसाद मिलेगा। पार्टी के जयचंदो  को सबक खुद मिल जाएगा। उन्होंने कहा कि जिन्होंने खुले तौर पर समाजवादी पार्टी को चुनाव लड़ाया है, उन पर कार्रवाई होनी चाहिए। वह लोग आज भी बड़ी सरकारी सुविधा ले रहे हैं, पार्टी इस ओर ध्यान देकर कार्यवाही करें। संजीव बालियान ने कहा कि 10 वर्ष उन्होंने क्षेत्र का विकास कराया। इनमें हाईवे निर्माण, संपर्क मार्ग, स्थानीय रेलवे स्टेशन का सौंदर्यकरण, लोकसभा क्षेत्र के 14 रेलवे स्टेशनों का पुनरुद्धार, आरआरटीएस का मेरठ तक आना और मुजफ्फरनगर के लिए स्वीकृति की ओर बढ़ना। फ्रेट कॉरिडोर का स्थापित होना आदि उनके विकास कार्यों में प्रमुख है। उन्होंने कहा कि जयचंदों का कुछ नहीं हो सकता, लेकिन विभीषणों के बारे में पार्टी निर्णय लेगी।

मुजफ्फरनगर सीट पर बीजेपी उम्मीदवार संजीव बालियान और सपा के उम्मीदवार हरेंद्र सिंह मलिक के बीच थी, लेकिन इस मुकाबले में सपा नेता बाजी मार गए. हरेंद्र ने भारी मतों से जीत दर्ज की है. सपा नेता हरेंद्र सिंह मलिक को कुल 470721 वोट मिले, तो वहीं बीजेपी नेता संजीव बालियान को 446049 वोट मिले थे. बसपा उम्मीदवार दारा सिंह प्रजापति को 143707 को वोट मिले थे. लोकसभा चुनाव में प्रचार के दौरान बालियान के काफिले पर खतौली विधानसभा क्षेत्र के गांव मढ़करीमपुर में पथराव हुआ। जिसमें पूर्व विधायक विक्रम सैनी समेत कई नेताओं की गाड़ी क्षतिग्रस्त हुईं। इस प्रकरण के बाद सरधना से पूर्व विधायक संगीत सोम ने संजीव बालियान को लेकर विवादित बयान भी दिए। 

दरअसल, डॉ. संजीव बालियान और संगीत सोम के बीच विवाद विधानसभा 2022 चुनाव के बाद पनपा. संगीत सोम को चुनाव हारने के बाद लगने लगा की उनकी हर के पीछे जाटों का कम वोट परसेंट होना रहा है. संगीत सोम ने इसका ठीकरा संजीव बालियान के सिर पर फोड़ा. धीरे-धीरे यह आपसी विवाद और बढ़ता गया. लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान विवाद खुलकर सामने आ गया. संगीत सोम ने संजीव बालियान को चुनाव में सबक सिखाने के लिए तरह-तरह के बयान दिए और पंचायते भी कीं. यही नहीं लोकसभा चुनाव में तो संजीव बालियान पर कई तरह की टिप्पणी और विरोधी बयान भी संगीत सोम ने दिए. लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान तो खतौली विधानसभा क्षेत्र के एक राजपूत के गांव में संजीव बालियान के काफिले पर हमला भी हुआ. षड्यंत्र का आरोप संगीत सोम पर लगा. सगीत सोम का सपा प्रत्याशी हरेंद्र मलिक के साथ चुनाव प्रचार का एक वीडियो भी वायरल हुआ था. अब लोकसभा परिणाम आने के बाद स्पष्ट हो गया कि संगीत सोम ने बालियान को चुनाव हारने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी. संगीत सोम के खुद गांव में बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा. वहीं सरधना विधानसभा में भी भाजपा हार गई. दरअसल, डॉ. संजीव बालियान और संगीत सोम के बीच विवाद विधानसभा 2022 चुनाव के बाद पनपा. संगीत सोम को चुनाव हारने के बाद लगने लगा की उनकी हर के पीछे जाटों का कम वोट परसेंट होना रहा है. संगीत सोम ने इसका ठीकरा संजीव बालियान के सिर पर फोड़ा. धीरे-धीरे यह आपसी विवाद और बढ़ता गया. लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान विवाद खुलकर सामने आ गया. संगीत सोम ने संजीव बालियान को चुनाव में सबक सिखाने के लिए तरह-तरह के बयान दिए और पंचायते भी कीं. यही नहीं लोकसभा चुनाव में तो संजीव बालियान पर कई तरह की टिप्पणी और विरोधी बयान भी संगीत सोम ने दिए. लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान तो खतौली विधानसभा क्षेत्र के एक राजपूत के गांव में संजीव बालियान के काफिले पर हमला भी हुआ. षड्यंत्र का आरोप संगीत सोम पर लगा. सगीत सोम का सपा प्रत्याशी हरेंद्र मलिक के साथ चुनाव प्रचार का एक वीडियो भी वायरल हुआ था. अब लोकसभा परिणाम आने के बाद स्पष्ट हो गया कि संगीत सोम ने बालियान को चुनाव हारने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी. संगीत सोम के खुद गांव में बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा. वहीं सरधना विधानसभा में भी भाजपा हार गई. संगीत सोम और संजीव बालियान के बीच यह राजनीतिक लड़ाई अब यह राजपूत बनाम जाट होती नजर आ रही है. भविष्य में इसका राजनीतिक खामियाजा भुगतना पड़ सकता है क्योंकि जाट समाज में इस बात का रोष है कि डॉक्टर संजीव बालियान को हराने के लिए राजपूत समाज और संगीत सोम ने एड़ी-चोटी के जोर लगाया है. डॉ. संजीव बालियान 24000 वोट से हार गए. सभी राजपूत बाहुल्य क्षेत्र में भी संजीव बालियान को उतना वोट नहीं मिला, जितना हमेशा बीजेपी प्रत्याशी को मिलता था, इसलिए आगामी चुनाव में जाट समाज की तरफ से भी इस तरह के विरोधी स्वर देखने को मिल सकते हैं.

पत्रकार वार्ता में भाजपा जिलाध्यक्ष सुधीर सैनी, जिला पंचायत अध्यक्ष डा. वीरपाल निर्वाल, मेरठ के जिलाध्यक्ष शिव कुमार राणा, पूर्व जिलाध्यक्ष देवव्रत त्यागी, जिला सहकारी बैंक के चेयरमैन ठा. राम नाथ भी मौजूद रहे।

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