देहरादून, खबर न्यू इंडिया (न्यूज़ डेस्क): देवभूमि उत्तराखंड विश्वविद्यालय के ललित कला विभाग के छात्रों देहरादून के आसपास होने वाले कला कार्यशालाओं में प्रतिभाग करके अपनी काबिलियत को बखूबी बढ़ा रहे है गुरु का सही मार्गदर्शन सदैव विद्यार्थियों को उन्नयन व प्रोत्साहन की ओर ले जाता है,   इसी क्रम में सांख्य आर्ट फाऊंडेशन, MYST, एवं परवरिश फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में राम झूला, ऋषिकेश में एकदिवसीय जल रंग कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में मुख्य डेमोंस्ट्रेटर/ प्रशिक्षक के रूप में काशी के प्रतिष्ठित कलाकार श्री हरि दर्शन सांख्य जी ने प्रतिभागियों को जल रंग के तकनीकी पक्षों से अवगत कराया। इन्होने प्राकृतिक वस्तुओं और दृश्यों को जल रंग में चित्रित करने की प्रारंभिक तकनीकें, बुनियादी रंगों का चयन, ब्रश का सही उपयोग, और कागज के प्रकार का चुनाव,  विभिन्न रंगों को मिलाने की विधियाँ और उनके प्रभाव, रंगों के छाया प्रकाश की परतें बनाना और उनका प्रभाव दिखाना आदि  को चित्रण में प्रयोग करके बताये, इन्होंने जल रंग की इन प्रयोगात्मक विधियों के साथ ही चाइनीस इंक से भी आकर्षक चित्रण किये, जो प्रतिभागियों के लिए एक नवीन और रचनात्मक अनुभव रहा। इनकी शैली और दृष्टिकोण से सभी कलाकार व प्रतिभागी प्रेरित हुए।
देहरादून के प्रतिष्ठित चित्रकार संतोष कुमार साहनी जी ने प्रतिभागियों को बताया कि जलरंग माध्यम में कार्य करते समय विषय वस्तु या स्थान का सटीक चयन बहुत महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने कहा कि कलाकार को बड़े विषय के बजाय छोटे और सार्थक अंश का संयोजन करना चाहिए और जल रंग माध्यम में एकाग्रता, निष्ठा, समर्पण, संघर्ष, और निरंतरता बनाए रखना आवश्यक है।
कार्यक्रम में सांख्य आर्ट फाउंडेशन के सह-संस्थापक श्री अरुण डबराल जी ने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएँ कला और कलाकारों के उत्थान के लिए बहुत आवश्यक हैं। इनसे उभरते कलाकारों को प्रतिष्ठित कलाकारों से सीखने का अवसर मिलता है और उन्हें प्रेरणा मिलती है। उन्होंने कहा कि कलाकारों की आत्मिक समझ और दृष्टिकोण सामान्य जनमानस से अलग होता है, जो कला के अनंत सागर में गहराई तक जाने की प्रेरणा देता है। देवभूमि उत्तराखंड विश्वविद्यालय के sojla स्कूल की संकाय प्रमुख डॉ भावना गोयल ने बच्चों को मार्गदर्शन देते हुए प्रतिभा करने पर भूरी भूरी प्रशंसा की।
कार्यशाला का संयोजन  डॉ. मंतोष यादव असिस्टेंट प्रोफेसर, ललित कला विभाग, देवभूमि उत्तराखंड विश्वविद्यालय देहरादून के द्वारा किया गया। इन्होंने आमंत्रित  कलाकारों का विशेष धन्यवाद ज्ञापन करते हुए बताया कि इस कार्यशाला में देहरादून, ऋषिकेश, और देवभूमि उत्तराखंड विश्वविद्यालय से लगभग 20 कलाकारों ने भाग लिया। सभी प्रतिभागियों ने जल रंग की तकनीक, रेखांकन, रंग संयोजन, छाया-प्रकाश, और परिप्रेक्ष्य जैसी बारीकियों से अवगत होकर इस कार्यशाला से लाभ उठाया।
कार्यक्रम के अंत में देहरादून के कलाकार आयुष गोल्डी एवं देवभूमि विश्वविद्यालय में कार्यरत शमशेर वारसी को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। साथ ही, देवभूमि उत्तराखंड विश्वविद्यालय के ललित कला विभाग के विद्यार्थियों, जिनमें दीपांशु, महेक, सलोनी, तृप्ति, मुस्कान, किशन, राकेश, शालिनी, प्रगति, बरखा, आयुष, और पूजा आदि को प्रतिभागिता प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।

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