हरियाणा में भाजपा ने रचा इतिहास, कांग्रेस का हो गया बंटाधार!
खबर न्यू इंडिया (न्यूज़ डेस्क) : हरियाणा के चुनावी इतिहास में इससे पहले ऐसा कभी नहीं हुआ, जब किसी दल ने हैट्रिक लगाई हो। कोई भी दल लगातार तीसरी बार सरकार नहीं बना पाया। इस बार भाजपा ने रिकॉर्ड बना दिया। 2014, 2019 में जीत के बाद 2024 के विधानसभा चुनाव में भी वह सरकार बनाने की स्थिति में है। हरियाणा विधानसभा चुनाव के नतीजों ने इस बार चौंका दिया। हरियाणा चुनाव के शुरुआती रुझानों में कांग्रेस को बढ़त दिखी तो दिल्ली में मौजूद कांग्रेस कार्यालय में जमकर जलेबी बांटी गई. पार्टी कार्यकर्ताओं ने जश्न मनाना शुरू कर दिया, लेकिन बाद के रुझानों में भाजपा ने वापसी कर ली और कांग्रेस से आगे निकल गई. कांग्रेस को इस बार के चुनावों में 39.05 प्रतिशत वोट हासिल हुए. वहीं बीजेपी को 39.8 फीसदी वोट मिले. दोनों में वोट शेयर लगभग समान था लेकिन कई ऐसी चीजें हुईं, जिससे कांग्रेस सत्ता की रेस में पिछड़ गई और बाजी धीरे- धीरे उसके हाथ से निकलती चली गई. हरियाणा में 15वीं विधानसभा चुनाव में 67.90 प्रतिशत मतदान हुआ। यह 2019 के विधानसभा चुनाव में 67.92 प्रतिशत के मुकाबले .02 प्रतिशत कम रहा। राज्य के विधानसभा चुनाव के इतिहास में यह चौथा मौका था, जब सबसे कम मतदान हुआ। इसे सत्ता विरोधी लहर से जोड़कर देखा गया क्योंकि 10 साल से भाजपा यहां सत्ता में थी।
हरियाणा में BJP ने बाजी पलट दी है. कुछ महीने पहले हुए लोकसभा चुनाव में 10 सीटों में हाफ रह गई BJP ने रणनीति बदली. नारे बदले. पोस्टर बदले. और फिर हरियाणा में तस्वीर बदल गई. BJP की यह खासियत है. वह गलतियों से बहुत जल्दी सीखती है. उसका माइक्रो मैनेजमेंट गजब का है. हरियाणा में BJP ने इसे फिर साबित किया. किसान, जवान और पहलवान के कांग्रेस के तिहरे अटैक को BJP कुंद करने में कामयाब रही. नतीजे बता रहे हैं कि जाट के साथ गैर-जाट को वह साधने में सफल रही. दलितों का दिल उसने जीता. उसका छिटका वोट भी उसकी तरफ खिंचा है. रियाणा में जीत की जलेबी BJP के हाथ लगी है. एग्जिट पोल्स के बाद जिन BJP नेताओं के चेहरे लटके हुए थे, वे अब कमल के फूल से खिले हुए हैं. राहुल गांधी ने जिस जलेबी के जरिए चुनाव में घेरा था, उसका मजा अब बीजेपी कार्यकर्ता ही ले रहे हैं. वह खूब छन रही हैं और जश्न में बंट रही हैं. मंगलवार सुबह वोटों की गिनती शुरू होने के बाद कांग्रेस मुख्यालय पर गहमागहमी थी. पोस्टल बैलट खुलने के बाद शुरुआती एक घंटे में कांग्रेस ने 90 में से 70 सीटों पर लीड ले ली. लगने लगा कि एग्जिट पोल बिल्कुल सच साबित हो रहे हैं. लेकिन एक घंटे बाद सीन पलट गया. धीरे-धीरे बीजेपी रुझानों में बहुमत के जादुई आकंड़े के पास पहुंची और फिर उसने कांग्रेस को ऐसे पीछे छोड़ा कि वह फिर आगे निकल नहीं पाई.
- हरियाणा में बेरोजगारी बड़ा मुद्दा रहा। कांग्रेस ने बेरोजगारी के ही मुद्दे को उठाकर युवाओं से वोट मांगे। राज्य में 18 से 39 साल के युवाओं के करीब 94 लाख मतदाता हैं। वहीं, भाजपा ने एक लाख 40 हजार युवाओं को सरकारी नौकरी देने को चुनावी मुद्दा बनाया।
- हरियाणा में किसी की भी सरकार बनाने में दलितों की अहम भूमिका रही है। राज्य में करीब 21 फीसदी दलित हैं। 17 सीटें अनुसूचित जाति के लिए रिजर्व हैं। भाजपा-कांग्रेस दोनों दलों ने दलित वर्ग को लुभाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। जब कांग्रेस के प्रचार से सिरसा से सांसद कुमारी सैलजा ने दूरी बना ली तो भाजपा ने इस मुद्दे को भुनाया। प्रचार के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि दलित बहन घर पर बैठी है। लोगों का एक बड़ा वर्ग आज सोच रहा है कि उन्हें क्या करना चाहिए। अगर वह (भाजपा में) आती हैं तो हम उन्हें शामिल करने को तैयार हैं।
- हरियाणा में 60 फीसदी से ज्यादा विधानसभा सीटें ग्रामीण इलाकों में किसान हैं। किसान आंदोलन के बीच भाजपा ने 24 फसलों को एमएसपी पर खरीदने का एलान कर दिया।
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