बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को सुनाई गई मौत की सजा
खबर न्यू इंडिया (न्यूज़ डेस्क) : बांग्लादेश के 'अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण' ने शेख हसीना और पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमान खान कमाल और पूर्व आईजीपी चौधरी अब्दुल्ला अल मामून के खिलाफ मामलों की सुनवाई पूरी कर सजा का एलान किया। बांग्लादेश की अदालत ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को निहत्थे नागरिकों पर गोली चलाने और मानवता के खिलाफ अपराध के मामले में दोषी ठहराया है. कोर्ट ने उन्हें फांसी की सजा सुनाई है. अदालत ने पाया कि शेख हसीना ने प्रदर्शनकारियों को दबाने और मारने के लिए घातक हथियारों और ड्रोन का इस्तेमाल करने के आदेश दिए थे. इस गंभीर अपराध के चलते उन्हें फांसी की सजा सुनाई गई है. कोर्ट ने कुल 54 गवाहों के बयान सुने और कहा कि यह संख्या पर्याप्त है. देशभर से प्राप्त सबूतों और विभिन्न स्रोतों से मिले अतिरिक्त सबूतों की भी जांच की गई. साथ ही, यूनाइटेड नेशंस की एजेंसी की रिपोर्ट का अध्ययन किया गया और निष्कर्ष निकाला गया कि शेख हसीना और गृहमंत्री के आदेशों पर ही मानवता के खिलाफ अपराध किए गए. न्यायाधिकरण ने स्पष्ट किया कि हसीना के बयान अपमानजनक थे और हिंसा को भड़काने वाले थे. उन्होंने जानबूझकर अपने आदेशों के माध्यम से लोगों की जान लेने की योजना बनाई. कोर्ट के पास हसीना और विश्वविद्यालय के कुलपति के बीच हुई बातचीत के रिकॉर्ड भी मौजूद हैं, जो उनके आदेशों की पुष्टि करते हैं. शेख हसीना और अन्य पर आरोप था कि उन्होंने छात्र आंदोलन को कुचलने की कोशिश की और उनके नेतृत्व में जुलाई 2023 में सुरक्षा कार्रवाई में 1400 लोग मारे गए। अभियोजन पक्ष ने शेख हसीना को हिंसा के पीछे का मास्टरमाइंड बताते हुए मौत की सजा की मांग की थी। वहीं शेख हसीना और उनकी पार्टी का दावा है कि राजनीतिक प्रतिशोध के चलते उनके खिलाफ ये मुकदमें दर्ज किए गए।
न्यायाधिकरण के फैसले को लेकर अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि मेरे खिलाफ सुनाए गए फैसले एक धांधली वाले न्यायाधिकरण द्वारा दिए गए हैं, जिसकी स्थापना और अध्यक्षता एक अनिर्वाचित सरकार द्वारा की गई है, जिसके पास कोई लोकतांत्रिक जनादेश नहीं है। वे पक्षपातपूर्ण और राजनीति से प्रेरित हैं। शेख हसीना ने कहा कि आईसीटी में कुछ भी अंतरराष्ट्रीय नहीं है; न ही यह किसी भी तरह से निष्पक्ष है। उनका दावा है कि न्यायाधिकरण ने केवल अवामी लीग के सदस्यों पर मुकदमा चलाया है, जबकि कथित तौर पर राजनीतिक विरोधियों द्वारा की गई हिंसा को नजरअंदाज किया है।
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