देहरादून, खबर न्यू  इंडिया (न्यूज़ डेस्क) : उत्तराखंड में हुए ताजा मंत्रिमंडल विस्तार ने प्रदेश की राजनीति में एक नया समीकरण खड़ा कर दिया है. मुख्यमंत्री के नेतृत्व में गठित इस नई टीम में जिन विधायकों को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है, वे न केवल अपने-अपने क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं, बल्कि राज्य की जटिल जातीय और सामाजिक संरचना को साधने का भी काम करेंगे. रुद्रप्रयाग से भरत चौधरी, रुड़की से प्रदीप बत्रा, हरिद्वार से मदन कौशिक, राजपुर से खजान दास और भीमताल से राम सिंह कैड़ा को मंत्रिमंडल में शामिल कर सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सामाजिक और जातीय संतुलन को प्राथमिकता दी जा रही है. शुक्रवार को आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में राज्यपाल ने खजान दास सहित सभी पांच नए मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई. नई कैबिनेट में क्षेत्रीय व जातीय समीकरण के बीच संतुलन बनाया गया। राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ कैबिनेट विस्तार पर कई दौर की वार्ता हो चुकी थी। सरकार व संगठन के बीच कैबिनेट विस्तार के लिए होमवर्क पूरा होने के बाद इसके लिए नवरात्र का शुभ मुहूर्त चुना गया। कैबिनेट विस्तार के जरिए मुख्यमंत्री धामी ने क्षेत्रीय संतुलन साधने का भी प्रयास किया है. मंत्रिमंडल में मैदान और पहाड़ दोनों क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व दिया गया है. खास बात यह रही कि पहली बार हरिद्वार जिले को दो कैबिनेट मंत्री मिले हैं, जो क्षेत्रीय संतुलन की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है. वर्तमान कैबिनेट संरचना में गढ़वाल मंडल से आठ और कुमाऊं मंडल से चार मंत्री शामिल हैं. इनमें तीन विधायक पहली बार कैबिनेट मंत्री बने हैं, जबकि दो अनुभवी नेताओं को दोबारा मौका दिया गया है. इस संतुलन के जरिए सरकार ने अनुभव और नए चेहरों का संयोजन पेश करने की कोशिश की है. उत्तराखंड में लंबे समय बाद कैबिनेट का पूरा होना ये बताता है कि सरकार चुनाव के मोड में जा चुकी है. काफी समय से प्रदेश की जनता के साथ-साथ बीजेपी के विधायक और अन्य नेता भी इस दिन का इंतजार कर रहे थे.

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