देहरादून, खबर न्यू इंडिया (न्यूज़ डेस्क): उत्तराखंड में देश का सबसे सख्त "नकल विरोधी कानून" लागू हो गया हैं राज्यपाल  ले.ज. गुरमीत सिंह (सेनि.) ने इसे मंजूरी दे दी हैं,  कैबिनेट न होने के बावजूद हमने नकल विरोधी अध्यादेश को विचलन से महामहिम राज्यपाल को अग्रसारित कर दिया है। यह भी तय कर दिया है कि अब जितनी भी परीक्षाएं होंगी वो सभी इस अध्यादेश से आच्छादित होंगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रदेश सरकार के लिए छात्रहित सर्वोपरि है। भर्ती परीक्षाओं में शुचिता एवं पारदर्शिता के लिए सख्त नकल विरोधी कानून लाया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नकल विरोधी अध्यादेश पहले 10 फरवरी को होने वाली कैबिनेट में लाया जाना था। किन्हीं कारणों से कैबिनेट में देरी हो गई। नकल विरोधी अध्यादेश को उन्होंने विचलन से स्वीकृति देकर राज्यपाल को अग्रसारित किया गया। अब यह कानून बन चुका है। युवाओं और परीक्षार्थियों को आश्वस्त करते हुए मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि अब भर्ती परीक्षाएं निष्पक्षता और पारदर्शिता से होंगी। युवा परीक्षाओं की तैयारी में लग जाएं। किसी तरह की अफवाह पर न जाएं। उन्होंने कहा कि कुल राजनीतिक संगठन छात्रों के कंधों पर बंदूक रखकर काम कर रहे हैं। ऐसे लोग अनावश्यक रूप से छात्र आंदोलन के बीच घुस गए। इनकी पहचान की जाएगी।

बेरोजगार संघ की सभी मांगों पर गंभीरता से विचार करने के बाद राज्य सरकार ने फैसला किया है कि पटवारी भर्ती पेपर लीक की एसआईटी जांच हाईकोर्ट के जज की निगरानी में कराई जाएगी। 12 फरवरी को होने जा रही पटवारी-लेखपाल परीक्षा व अन्य सभी भर्ती परीक्षाएं नए कानून के तहत ही आयोजित होंगी। देर शाम सरकार ने जारी बयान में कहा कि बेरोजगार संघ की मांगों पर सहमति बन गई है। सरकार ने कहा सीबीआई जांच की मांग को उत्तराखंड हाईकोर्ट अस्वीकार कर चुका है।

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