अक्षय तृतीया पर 22 अप्रैल को खुलेंगे यमुनोत्री के कपाट
देहरादून, खबर न्यू इंडिया (न्यूज़ डेस्क): चारधाम के पहले प्रमुख तीर्थ धाम यमुनोत्री के कपाट 22 अप्रैल को अक्षय तृतीया के पर्व पर दोपहर 12 बजकर 41मिनट पर कर्क लग्न अभिजित मुहूर्त पर श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। आज मां यमुना के मायके खरशालीगांव में स्थित शीतकालीन यमुना मंदिर परिसर में पुरोहित समाज की बैठक में यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने का विधिवत ढंग से शुभ मुहूर्त निकाला गया। इस मौके पर पुरोहित महासभा अध्यक्ष पुरुषोत्तम उनियाल, यमुनोत्री मंदिर समिति के सचिव सुरेश उनियाल उपाध्यक्ष,राजस्वरुप उनियाल, प्यारे लाल उनियाल, पवन उनियाल शीतकालीन पुजारी अंकित,जय कृष्ण, प्रभाकर उनियाल, के अलावा आशुतोष उनियाल, कुलदीप उनियाल, आदि मौजूद थे । पुरुषोत्तम उनियाल, सुरेश उनियाल ने बताया कि 22 अप्रैल को कपाट उदघाटन की तैयारियों के साथ ही यमुना के मायके खरशालीगांव में में भी मां यमुना की विदाई की तैयारियां शुरू की गयी है।
हिमालय की चारधाम यात्रा धर्मनगरी हरिद्वार और तीर्थनगरी ऋषिकेश से शुरू होती है, लेकिन शास्त्रों में इसकी शुरुआत यमुनोत्री धाम से मानी गई है। देवी यमुना भक्ति की अधिष्ठात्री हैं। 'स्कंद पुराण' के 'केदारखंड' में कहा गया है कि भक्ति के बिना ज्ञान की प्राप्ति संभव नहीं। इसलिए यमुनोत्री के बाद ही गंगोत्री धाम की यात्रा करनी चाहिए, क्योंकि देवी गंगा ही ज्ञान की अधिष्ठात्री हैं। ज्ञान इंसान को वैराग्य यानी बाबा केदार की शरण में ले जाता है। यही वह स्थिति है, जब जीवन में कुछ भी पाने की चाह शेष नहीं रह जाती। शास्त्रों में कहा गया है कि यही निर्विकार भाव जीव को भगवान बदरी विशाल की शरण में ले जाता है। यहां आनंद ही आनंद है। इसीलिए बदरीनाथ धाम को पृथ्वी पर वैकुंठ यानी भू-वैकुंठ की उपमा दी गई है। हालांकि यह कोई शास्त्रीय बंधन नहीं है और आप अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी धाम की यात्रा कर सकते हैं। उत्तरकाशी जिले में स्थित यमुनोत्री धाम को चारधाम यात्रा का प्रथम पड़ाव माना गया है। यहां सूर्यपुत्री और शनि व यम की बहन देवी यमुना की आराधना होती है। समुद्रतल से 3235 मीटर (10610 फीट) की ऊंचाई पर स्थित यमुनोत्री धाम से एक किमी. की दूरी पर चंपासर ग्लेशियर है, जो यमुनाजी का मूल उद्गम है। समुद्रतल से इस ग्लेशियर की ऊंचाई 4421 मीटर है। धर्मग्रंथों में उल्लेख है कि यह पवित्र स्थान एक साधु असित मुनि का निवास स्थल था। उन्होंने यहां देवी यमुना की आराधना की, जिससे प्रसन्न हो यमुनाजी ने उन्हें दर्शन दिए। यमुनोत्री धाम पहुंचने के लिए जानकीचट्टी से छह किमी. की खड़ी चढ़ाई पैदल तय करनी पड़ती है। यहां पर स्थित यमुना मंदिर का निर्माण जयपुर की महारानी गुलेरिया ने 19वीं सदी में करवाया था।
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