प्रयागराज,खबर न्यू इंडिया (न्यूज़ डेस्क): उत्तर प्रदेश के बहुचर्चित ज्ञानवापी मस्जिद और स्वयंभू भगवान विश्वेश्वर के बीच चल रहे विवाद को लेकर दाखिल याचिकाओं पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई टल गई है. कोर्ट अब इस मामले में 14 जुलाई को सुनवाई करेगी। मामले में कोर्ट ने 28 नवम्बर 2022 को ही सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित कर लिया था। लेकिन कुछ बिंदुओं पर पक्षकारों के अधिवक्ता से स्पष्टीकरण करने के लिए फिर से सुनवाई का आदेश दिया था। कोर्ट ने 24 जुलाई को सुनवाई की थी लेकिन उस दिन बहस के लिए 26 मई की तिथि तय कर दी थी। गौरतलब है कि वाराणसी की जिला अदालत में 31 साल पहले वर्ष 1991 में मुकदमा दाखिल हुआ था, जो बाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट की दहलीज तक पहुंचा. आपको बता दें कि 20 मई को हुई पिछली सुनवाई पर हिंदू पक्ष ने अपनी बहस पूरी कर ली थी. स्वयंभू भगवान विश्वेश्वर पक्षकार की तरफ से उनके वाद मित्र विजय शंकर रस्तोगी ने अपना पक्ष रखा था, जिसके बाद यूपी सुन्नी सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड के अधिवक्ता पुनीत गुप्ता ने अपनी दलीलें पेश की थीं. अब इस मामले में आगे की सुनवाई में मुस्लिम पक्षकार अपनी बहस जारी रखेंगे, जबकि मुस्लिम पक्ष की बहस पूरी होने के बाद इस मामले में यूपी सरकार भी अपना पक्ष रखेगी. 

याचियों की तरफ से बहस की गई थी कि प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 की धारा चार के तहत सिविल वाद पोषणीय नहीं है। स्थापित कानून हैं कि कोई आदेश पारित हुआ है और अन्य विधिक उपचार उपलब्ध नहीं है तो अनुच्छेद 227 के अंतर्गत याचिका में चुनौती दी जा सकती है। विपक्षी मंदिर पक्ष का कहना था कि भगवान विश्वेश्वर स्वयं भू भगवान है। वह प्रकृति प्रदत्त है। मानव द्वारा निर्मित नहीं है। उन्होंने इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के एम सिद्दीकी बनाम महंत सुरेश दास व अन्य केस के फैसले का हवाला दिया था। उन्होंने कहा कि मूर्ति स्वयं भू प्राकृतिक है। इसलिए प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट की धारा चार इस मामले में लागू नहीं होगी। कहना था कि सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश सात के नियम 11 की अर्जी वाद के तथ्यों पर ही तय होगी। सिविल वाद में लिखा है कि स्वयं भू विश्वेश्वर नाथ मंदिर सतयुग से है। 15 अगस्त 1947 से पहले और बाद में लगातार निर्बाध रुप से पूजा की जा रही है।

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