लखनऊ/खबर न्यू इंडिया (न्यूज़ डेस्क): यूपी में ‘हलाल सर्टिफिकेट’ वाले उत्पादों पर योगी सरकार ने बैन लगा दिया हैं, हाल ही के दिनों में सामने आया है कि हलाल का कारोबार उत्तर प्रदेश में लगातार फैल रहा था और इसके लिए कई कंपनियां सर्टिफिकेट जारी कर रही थीं। आरोप हैं कि जमीयत उलेमा-ए हिंद भी सर्टिफिकेट दे रहा था। मामले में शिकायतकर्ता शैलेंद्र कुमार शर्मा ने आरोप लगाए कि धर्म विशेष की कुछ संस्थाएं खुद से हलाल सर्टिफिकेट जारी कर रही थीं। ये सर्टिफिकेट ना केंद्र सरकार जारी कर रही है और ना ही राज्य सरकार जारी कर रही है। बस कुछ कंपनियां और संस्थाएं मनमाने ढंग से हलाल सर्टिफिकेट बांट रही हैं। यूपी सरकार ने कहा कि तेल, साबुन, टूथपेस्ट और शहद जैसे शाकाहारी प्रोडक्ट्स के लिए हलाल प्रमाणपत्र जरूरी नहीं है. एफएसडीए की अपर मुख्य सचिव अनीता सिंह ने इस संबंध में शनिवार को शासनादेश जारी कर दिया है. प्रदेश में हलाल प्रमाणित खाद्य दवाओं और चिकित्सा और प्रसाधन सामग्रियों का निर्माण, भंडारण या खरीद-फरोख्त पर प्रतिबंध लगा दिया है. राज्य सरकार ने इसे निषेधित कर दिया है. अब इन उत्पादों पर हलाल प्रमाणन कराने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी. हाल के दिनों में प्रदेश सरकार को ऐसी जानकारी मिल रही थी कि डेरी उत्पाद, चीनी, बेकरी उत्पाद, पिपरमिन्ट ऑयल, नमकीन रेडी-टू-ईट वेवरीज व खाद्य तेल जैसे उत्पादों के लेबल पर हलाल प्रमाणन का उल्लेख किया जा रहा है। यही नहीं, कतिपय दवाइयों, चिकित्सा युक्तियों व प्रसाधन सामग्रियों के उत्पाद के पैकिंग व लेबलिंग पर हलाल प्रमाण पत्र का भी अंकन किए जाने की सूचना मिली है।

हलाल सर्टिफिकेशन क्या होता है' 

  • हलाल सर्टिफिकेट ऐसा प्रमाणपत्र है, जो प्रोडक्ट की गारंटी देता है। यानी उत्पाद इस्लामिक नियमों के अनुसार बना है।
  • खाने-पीने का सामान बेचने के लिए इसका इस्तेमाल होता है।
  • कॉस्मेटिक और दवाओं में भी इसका प्रयोग होता है।
  • मुस्लिम आबादी वाले देशों में इसका ज्यादा इस्तेमाल होता है।

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