खबर न्यू इंडिया (न्यूज़ डेस्क)  : भारत और मालदीव के बीच जारी कूटनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। हालिया घटनाक्रम में द्वीपीय राष्ट्र की सरकार ने अपने देश से भारतीय सैनिकों को वापस भेजने की समयसीमा तय कर दी है। मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मोइज्जु ने भारत से कहा है कि 15 मार्च तक वह अपने सैनिकों को हटा ले।  . 2023 मालदीव आम चुनाव के दौरान मुइज्जू की पार्टी का चुनावी वादा था कि अगर चुनाव में जीते तो भारतीय सैनिकों को मालदीव छोड़कर जाने को कहा जाएगा।ताजा सरकारी आंकड़ों के अनुसार मालदीव में भारतीय सेना के कुल 88 अधिकारी हैं। ऐसे में मालदीव के राष्ट्रपति का इस तरह का फरमान सुनाना तार्किक तो नहीं लगता। यह भी कहा जा रहा है कि वह इस तरह के फैसले चीन की शह पर ले रहे हैं। 
भारत ने मालदीव को टोही जहाज, डोर्नियर विमान और 2 एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर किए थे, इसके साथ ही भारत ने जहाजों की देखरेख के लिए कुछ भारतीय सैनिकों को भेजा है. ये भारतीय सैनिक वहां निहत्थे होते हैं. दरअसल ये सेना में टेक्निकल जिम्मेदारी संभालने वाले सैनिक हैं. भारत की तरफ से भेजे गये डॉर्नियर विमान की मदद से मालदीव ने अपनी सर्विलांस क्षमता को मजबूत किया है. इसकी मदद से उसकी सरहदें सुरक्षित हो गईं हैं. भारत इन इलाकों की चौकसी में मालदीव की मदद करता है. भारत और मालदीव का विभिन्न मामलों में सहयोग का पुराना इतिहास रहा है। इसमें डिफेंस का क्षेत्र भी शामिल है। भारतीय सैनिक नवंबर 1988 में एक बार असल सैन्य ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए मालदीव गए थे। उनका लक्ष्य तख्तापलट के प्रयास को नाकाम करना था। उन्होंने इस अभियान को मालदीव के तत्कालीन राष्ट्रपति मौमून अब्दुल गयूम के अनुरोध पर किया था। मालदीव इसे लेकर भारत की भूमिका की सराहना करता रहा है।

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