वन नेशन वन इलेक्शन प्रस्ताव को कैबिनेट की मंजूरी
देहरादून, खबर न्यू इंडिया (न्यूज़ डेस्क) : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में 'एक देश, एक चुनाव' पर बनी कोविंद समिति की रिपोर्ट को मंजूरी मिल गई है। माना जा रहा है कि केन्द्र की मोदी सरकार आगामी शीतकालीन सत्र में इसे सदन में पेश कर सकती है। पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के नेतृत्व वाली समिति ने वन नेशन वन इलेक्शन को लेकर मार्च 2024 में अपनी रिपोर्ट सौंपी थी.
- केंद्र सरकार वन नेशन वन इलेक्शन बिल को शीतकालीन सत्र में संसद से पास कराएगी, जिसके बाद यह कानून बन जाएगा. पूर्व राष्ट्रपति की अगुआई वाली समिति ने वन नेशन वन इलेक्शन को लेकर देश की 62 राजनीतिक पार्टियां से संपर्क किया था, जिसमें से उन्हें 32 पार्टियों का समर्थन मिला था. इसमें 15 पार्टियों ने वन नेशनल वन इलेक्शन का समर्थन नहीं किया तो वहीं 15 पार्टियों ने कोई जवाब नहीं दिया.
- इस रिपोर्ट में पहले फेज में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराए जाने की बात कही गई. इसमें आगे यह सिफारिश की गई है कि लोकसभा और राज्यों के विधानसभा चुनाव एक साथ पूरा होने के 100 दिनों के भीतर स्थानीय निकाय चुनाव भी कराए जाएं. समिति की सिफारिश में कहा गया, "पूरे देश में मतदाताओं के लिए एक ही मतदाता सूची होनी चाहिए. सभी के लिए एक जैसा वोटर कार्ड होना चाहिए.
- केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट के फैसलों की ब्रीफिंग करते हुए कहा कि देश में 1951 से 1967 तक एक साथ चुनाव होते थे. उन्होंने कहा, समाज के सभी वर्गों से राय मांगी गई. अगले कुछ महीनों में आम सहमति बनाने की कोशिश करेंगे. समिति ने 191 दिन इस विषय पर काम किया. इस विषय पर समिति को 21 हजार 558 रिएक्शन मिले. इसमें से 80 फीसदी ने एक देश एक चुनाव का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2019 के स्वतंत्रता दिवस पर एक देश एक चुनाव का जिक्र किया था। तब से अब तक कई मौकों पर भाजपा की ओर एक देश एक चुनाव की बात की जाती रही है। ये विचार इस पर आधारित है कि देश में लोकसभा और सभी राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव एक साथ हों। अभी लोकसभा यानी आम चुनाव और विधानसभा चुनाव पांच साल के अंतराल में होते हैं। इसकी व्यवस्था भारतीय संविधान में की गई है। अलग-अलग राज्यों की विधानसभा का कार्यकाल अलग-अलग समय पर पूरा होता है, उसी के हिसाब से उस राज्य में विधानसभा चुनाव होते हैं।
वन नेशन वन इलेक्शन प्रस्ताव को कैबिनेट की मंजूरी दे दी गई है. यानी 2029 के लोकसभा चुनाव में लोकसभा और सभी प्रदेशों की विधानसभाओं के चुनाव एक साथ होंगे. इसके साथ ही ये भी संभावना व्यक्त की जा रही है कि अगली बार 543 लोकसभा सीटों के बजाय 750 सीटों पर चुनाव कराए जाएंगे. दरअसल 2002 के एक परिसीमन के तहत 2026 तक लोकसभा की सीटें बढ़ाने पर रोक लगी है. कहने का आशय ये है कि उसके बाद की जनगणना के आधार पर ही परिसीमन हो सकता है. इसी संदर्भ में ये कहना जरूरी है कि जनगणना भी 2027 में होनी है. ऐसे में उसके बाद होने वाले चुनावों के मद्देनजर लोकसभा सीटें बढ़ सकती हैं.
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