देहरादून, खबर न्यू इंडिया (न्यूज़ डेस्क) : देवभूमि उत्तराखंड विश्वविद्यालय के स्कूल आफ जर्नलिज्म एंड लिबरल आर्ट ने आज राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के उपलक्ष्य में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया। इस अवसर पर विद्यार्थियों में शिक्षा के प्रति जागरूकता उत्पन्न करने और मौलाना अबुल कलाम आजाद के योगदान को सम्मानित करने हेतु विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। इनमें स्लोगन लेखन, पोस्टर मेकिंग, निबंध लेखन और पेंटिंग प्रतियोगिताएँ शामिल थीं, जिनमें लगभग 60 विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ स्कूल ऑफ जर्नलिज्म एंड लिबरल आर्ट्स की संकाय प्रमुख, डॉ. भावना गोयल ने दीप प्रज्वलन के साथ किया। इस अवसर पर उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय शिक्षा दिवस का महत्व बताया और शिक्षा के प्रति उनकी समझ को बढ़ाने का प्रयास किया। उन्होंने विद्यार्थियों को मौलाना अबुल कलाम आजाद के अमूल्य योगदान की जानकारी दी, जिन्होंने देश के प्रथम शिक्षा मंत्री के रूप में भारतीय शिक्षा प्रणाली की नींव रखी। डॉ. गोयल ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि शिक्षा न केवल ज्ञान प्राप्ति का माध्यम है, बल्कि यह युवाओं को समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में भी सहायक है। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को बधाई दी और यह भी कहा कि इस प्रकार के आयोजन छात्रों के लिए शिक्षा का एक महत्वपूर्ण पहलू हैं, जो उनके दृष्टिकोण को और सुदृढ़ करते हैं। कार्यक्रम के समापन पर सभी विद्यार्थियों ने शिक्षा को अपने जीवन में सर्वोपरि मानते हुए समाज और देश की प्रगति में योगदान देने का संकल्प लिया। अपने समापन वक्तव्य में डॉ. गोयल ने कहा कि शिक्षा का असली उद्देश्य केवल ज्ञान अर्जन करना नहीं है, बल्कि समाज के हित में इसे उपयोग करना होना चाहिए।

विविध प्रतियोगिताओं का आयोजन और मुख्य निर्णायक मंडल: स्लोगन लेखन, पोस्टर मेकिंग, निबंध लेखन और पेंटिंग जैसी प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। निर्णायक मंडल में मैनेजमेंट संकाय प्रमुख मेजर जनरल प्रो. डॉ. ओपी सोनी, संकाय प्रमुख डॉ. भावना गोयल, अंग्रेजी विभाग की सह आचार्य डॉ. सुनीता भोला और ललित कला विभाग के कार्यवाहक प्रमुख डॉ. राजकुमार पांडे शामिल थे। उन्होंने विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों का निष्पक्ष मूल्यांकन किया, विशेषकर इस बात का ध्यान रखा कि किस प्रकार विद्यार्थियों ने शिक्षा के महत्व और उसके सकारात्मक प्रभाव को अपनी रचनाओं में उकेरा है। इस अवसर पर एसोसिएट डीन अकादमिक, डॉ. कनिष्क झा ने भी छात्रों की प्रतिभा की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजनों में सहभागिता से छात्रों की रचनात्मकता और सृजनात्मकता को बढ़ावा मिलता है। विद्यार्थियों द्वारा बनाए गए पोस्टर और पेंटिंग्स की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन उनके ज्ञान को समृद्ध करने और शिक्षा के प्रति उनकी दृष्टि को सकारात्मक दिशा देने में सहायक होते हैं। डॉ. मंतोष यादव ने कला अवलोकन उपरांत बच्चों को किताबी ज्ञान से अधिक व्यावहारिक ज्ञान को आत्मसात तथा उसे क्रियान्वित करने का संदेश दियाl

मौलाना अबुल कलाम आजाद की प्रेरणादायक जीवन यात्रा: कार्यक्रम में बच्चों का उत्साह बढ़ाते हुए, ललित कला विभाग के कार्यवाहक प्रमुख डॉ. राजकुमार पांडे ने मौलाना अबुल कलाम आजाद के जीवन की कई प्रेरणादायक घटनाएँ साझा कीं। उन्होंने बताया कि कैसे मौलाना आजाद ने अपने जीवन में कई कठिनाइयों का सामना किया, फिर भी शिक्षा के क्षेत्र में अद्वितीय योगदान दिया। डॉ. पांडे ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि हमें शिक्षा को केवल ज्ञान प्राप्ति का साधन न मानकर, इसे एक जिम्मेदार नागरिक बनने का माध्यम मानना चाहिए। उन्होंने छात्रों को मौलाना आजाद की शिक्षाओं से प्रेरणा लेने और अपने समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की ओर प्रेरित किया।

प्रतियोगिताओं का समर्पित संचालन: प्रतियोगिताओं का सुचारू संचालन करने में कार्यक्रम संयोजिका सौम्या रावत, नेहा और सह-संयोजिका शालिनी भंडारी का विशेष योगदान रहा। उन्होंने पूरी प्रतिबद्धता के साथ आयोजन का संयोजन किया और यह सुनिश्चित किया कि सभी प्रतियोगिताएँ सफलतापूर्वक सम्पन्न हों। सौम्या और शालिनी ने प्रतिभागियों को अपनी रचनात्मकता दिखाने का उचित अवसर प्रदान किया और अपने समर्पण के बल पर इस आयोजन को सफल व यादगार बनाया। 

पुरस्कार वितरण और समापन समारोह: कार्यक्रम के अंत में पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें प्रत्येक प्रतियोगिता के प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र और स्मृति चिन्ह प्रदान किए गए। इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने न केवल शिक्षा के प्रति जागरूकता और रचनात्मकता को व्यक्त किया, बल्कि मौलाना आजाद की शिक्षाओं से प्रेरणा लेते हुए शिक्षा के प्रति अपने दृष्टिकोण को और अधिक सुदृढ़ किया।

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