देहरादून, खबर न्यू इंडिया (न्यूज़ डेस्क)  : अ सोल आर्ट फाउंडेशन एवं कलागिरी आर्ट फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित अंतरराष्ट्रीय चित्रकला कार्यशाला "भद्राज मंदिर - 2.0" में देवभूमि उत्तराखंड विश्वविद्यालय, ललित कला विभाग के 12 विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया। दिनांक 15 व 16 फरवरी को यह कार्यशाला भारत एवं नेपाल के सैकड़ों प्रतिष्ठित कलाकारों की उपस्थिति में संपन्न हुई, जिसमें देश- विदेश से आए कलाकारों ने अपने चित्रों के माध्यम से अपनी कला प्रतिभा का प्रदर्शन किया। इस कार्यशाला में भारत के प्रसिद्ध जलरंग कलाकार विजय बिसवाल विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्हें रेल चित्रकार के रूप में जाना जाता है, क्योंकि उनकी कलाकृतियों में रेलवे स्टेशनों और रेलगाड़ियों के चित्रण की विशेष पहचान है। साथ ही, उन्होंने विभिन्न ऐतिहासिक भवनों, मंदिरों, किलों, राजमहलों और प्राचीन इमारतों को जलरंग माध्यम से जीवंत किया है। कार्यशाला के दौरान उन्होंने भद्राज मंदिर एवं उसके आसपास के पहाड़ी परिदृश्य, ग्रामीण जीवन और वनस्पति सौंदर्य को उकेरा, जिसे देखकर उपस्थित दर्शक और प्रतिभागी कलाकार मंत्रमुग्ध हो गए।


भारत के बेंगलुरु से आए उभरते युवा कलाकार एम.के. गोयल भी इस कार्यशाला में उपस्थित रहे। उन्होंने उत्तराखंड को "देवभूमि, तपोभूमि एवं योगभूमि" के रूप में चित्रित करते हुए एक संत का चित्र बनाया। उनके चित्र में रंग संयोजन और चित्र संरचना का उत्कृष्ट संतुलन देखा गया, जिसने प्रतिभागियों को कला की नई तकनीकों को सीखने का अवसर दिया। उत्तर प्रदेश के काशी से पधारे युवा कलाकार हरिदर्शन सांख्य जी ने हिमालय, पर्वतीय प्राकृतिक सौंदर्य और उत्तराखंड की स्थानीय विशेषताओं को अपनी तूलिका से कैनवास पर उकेरा। उनके द्वारा चित्रित प्राकृतिक दृश्य इतने प्रभावशाली थे कि सभी प्रतिभागियों ने हर्षोल्लास और प्रशंसा व्यक्त की, देवभूमि उत्तराखंड विश्वविद्यालय, ललित कला विभाग के सहायक आचार्य डॉ. मंतोष यादव को भी इस कार्यशाला में आमंत्रित कलाकार के रूप में आमंत्रित किया गया। उन्होंने भद्राज मंदिर, पर्वतीय परिदृश्य, ग्रामीण जीवन और प्राकृतिक दृश्यों को खूबसूरत तरीके से चित्रित किया। उनकी कलाकृतियां दर्शकों के लिए प्रेरणादायक और ज्ञानवर्धक साबित हुईं।


कार्यशाला में देवभूमि उत्तराखंड विश्वविद्यालय के सभी प्रतिभागी विद्यार्थियों को उनके विशेष कला प्रदर्शन के लिए प्रमाण पत्र एवं पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनकी कला साधना और उत्कृष्ट प्रदर्शन का प्रमाण है। कार्यशाला में सम्मान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को देवभूमि उत्तराखंड विश्वविद्यालय के विभिन्न पदाधिकारियों द्वारा शुभकामनाएं दी गईं। अकादमिक अधिष्ठाता, डॉ. कनिष्क झा ने सभी सम्मानित विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाओं में भागीदारी से विद्यार्थियों की कला, तकनीकी ज्ञान एवं कौशल में अभूतपूर्व वृद्धि होती है। उन्होंने विद्यार्थियों को आगे भी ऐसे आयोजनों में भाग लेने के लिए प्रेरित किया। सोजला स्कूल की अधिष्ठाता, डॉ. भावना गोयल ने डॉ. मंतोष यादव एवं सभी विद्यार्थियों को शुभकामनाएं दीं और कहा कि भविष्य में भी इस तरह के आयोजनों में शिक्षकों और विद्यार्थियों की सहभागिता अनिवार्य होनी चाहिए। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि ऐसे आयोजनों से विद्यार्थियों का आत्मविश्वास बढ़ता है और वे अपने विषय में अधिक गहराई से अध्ययन कर पाते हैं। ललित कला विभाग के प्रमुख कार्यवाहक, डॉ. राजकुमार पांडे ने इसे विभाग के लिए एक गौरवशाली क्षण बताया और कहा कि 12 विद्यार्थियों का एक साथ सम्मान प्राप्त करना यह दर्शाता है कि विश्वविद्यालय में कला शिक्षा का स्तर उच्चतम श्रेणी का है। उन्होंने विद्यार्थियों को अधिक से अधिक कार्यशालाओं में भाग लेने के लिए प्रेरित किया। ललित कला विभाग के सहायक आचार्य दीपशिखा मौर्य, सौम्या रावत, शमशेर वारसी, शालिनी भंडारी, राहुल यादव एवं भानु देव शर्मा ने भी विद्यार्थियों की सफलता की सराहना की और कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं विद्यार्थियों को उनके विषय की विविधता एवं गहराई से परिचित कराती हैं, जिससे उनका कला दृष्टिकोण और अधिक व्यापक होता है।


देवभूमि उत्तराखंड विश्वविद्यालय, ललित कला विभाग के विद्यार्थियों में दिव्यांशु, किशन, दीया परमार, पूनम, ऋषभ, विनीषा, अंशु, समृद्धि, विभुषा, शालिनी, बबिता, अर्शी, आदि ने इस कार्यशाला में अपनी प्रतिभा और कला कौशल का शानदार प्रदर्शन किया। विश्वविद्यालय की इस उपलब्धि से न केवल ललित कला विभाग बल्कि संपूर्ण उत्तराखंड को गर्व का अनुभव हुआ।

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