देहरादून, खबर न्यू  इंडिया (न्यूज़ डेस्क) : मोहाली चंडीगढ़ में चल रही है अष्टादश महापुराण में, कुर्म पुराण पर डॉ.भारत भूषणाचार्य जी ने, बताया कि मनुष्य जन्म अनंत पुण्य की शुभ फल से प्राप्त होता है भगवान को भी यदि मनुष्य बना पड़ा तो सर्वप्रथम भगवान को मत्स्य रूप धारण करना पड़ा, भगवान सबसे पहले जलचर बने उसके बाद भगवान का कूर्म अवतार हुआ क्योंकि कछुआ जल में भी रहता है और जल से बाहर भी भगवान का तीसरा अवतार वाराह अवतार हुआ भगवान का चौथा अवतार नरसिंह अवतार हुआ फिर भी भगवान पूर्ण मनुष्य नहीं बन पाएगा मनुष्य और आधा पशु और मनुष्य भी बने तो सबसे छोटे भगवान का पांचवा अवतार वामन अवतार भगवान का छठा अवतार परशुराम अवतार भगवान का सातवां अवतार राम अवतार आठवां कृष्णा नव वां बुद्ध  दशवां कल्की, भगवान के 10 अवतारों का वर्णन किया और सनातन के प्रति सभी को जागृत किया। 
देवी भागवत पुराण पर डॉक्टर सुरेश भट्ट जी ने देवी के महत्व में को विस्तृत तरीके से बताया, लिंग पुराण की महिमा को बताते हुए आचार्य राधे श्याम नौटियाल ने कहा कि गौ माता राष्ट्र माता पद पर आसीन हो वाराह पुराण, की महिमा को बताते हुए आचार्य मुकेश उनियाल जी ने सनातन की विशेषता बताई, भविष्य पुराण पर आचार्य बृजेश जगूड़ी , स्कंद पुराण पर आचार्यकपिल कृष्ण, नारद पुराण पर आचार्य हर्षमणी भट्ट, मार्कंडेय पुराण पर आचार्य दीपक बधानी, भागवत पुराण पर आचार्य संदीप सेमवाल, आचार्य सुभाष जोशी एवं सभी पुराणों पर सभी विद्वानों के द्वारा, राष्ट्रहित और गौ हित की बात एक स्वर में सबने की। 
इस यज्ञ के यज्ञाचार्य सामवेदी दुर्गेश बिंजोला जी रहे, मुख्य पीठ पर स्वामी नारायण दास जी, व श्री सुभाष शास्त्री' जी रहे। 

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