जयंत चौधरी का भाजपा से गठबंधन हुआ तो आरएलडी को खोई जमीन लग सकती है हाथ !
लखनऊ,खबर न्यू इंडिया (न्यूज़ डेस्क) : पश्चिमी यूपी में सियासी आधार रखने वाली आरएलडी अब इंडिया गठबंधन से नाता तोड़कर बीजेपी नेतृत्व वाले एनडीए के साथ जाने की तैयारी में है. लोकसभा चुनाव से पहले वेस्ट यूपी की राजनीति की धुरी चौधरी जयंत सिंह बन गए हैं। एनडीए के साथ बातचीत शुरू होने के बाद हर किसी की नजर उन पर ही टिकी है कि उनका अंतिम फैसला क्या होता है। सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी ने रालोद को उत्तर प्रदेश में चार लोकसभा सीटें कैराना, बागपत, मथुरा और अमरोहा की पेशकश की है और दोनों पार्टियों के बीच बातचीत जारी है. वेस्ट यूपी की बागपत, कैराना, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बुलंदशहर, गाजियाबाद, बिजनौर, नोएडा, अमरोहा, मुरादाबाद, संभल, पीलीभीत, बरेली, आंवला, बदांयू, मथुरा, फतेहपुर सीकरी, फिरोजाबाद, आगरा, अलीगढ़, हाथरस सीटों पर जाट वोटर हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि गठबंधन हुआ और मथुरा लोकसभा सीट रालोद के हिस्से में गई तो 2009 की तरह एक बार फिर जयंत चौधरी यहां से चुनाव लड़ सकते हैं। रालोद को न सिर्फ मथुरा बल्कि प्रदेश के अन्य जाट बहुल सीटों पर भी खोई जमीन वापस मिल जाएगी। 2009 में रालोद ने जयंत चौधरी को भाजपा के साथ गठबंधन में इसी सीट से लांच किया था। वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री के साथ जयंत चौधरी की सोमवार देर रात मीटिंग हुई. बीजेपी की तरफ से आरएलडी के विलय की शर्त रखी गई है. वहीं जयंत चौधरी ने 7 सीटों की मांग की है. हालांकि, अभी फॉर्मूला फाइनल नहीं हुआ है. जल्दी ही अगली मीटिंग होगी जिसमें विलय या गठबंधन पर फाइनल बातचीत होगी. इसी बीच, जयंत चौधरी ने अपना एक बड़ा कार्यक्रम भी रद्द कर दिए हैं. 12 फरवरी को पिता अजीत चौधरी की जयंती पर छपरौली में होनी थी, जहां उनकी 12 क्विंटल वजनी आदमकद प्रतिमा का लोकार्पण होना था. इस कार्यक्रम में सपा प्रमुख अखिलेश यादव को बुलाना पड़ता. इससे बचने की कोशिश में जयंत ने कार्यक्रम ही टाल दिया है.
अखिलेश ने जयंत चौधरी को जो सात सीटें दी है, उसमें से पांच सीट पर आरलडी के चुनाव निशान पर अपने नेताओं को चुनाव लड़ाने का फॉर्मूला रखा है, उसे आरएलडी को स्वीकार नहीं है. जयंत चौधरी की बीजेपी के साथ नजदीकियां बढ़ने लगीं. पश्चिमी यूपी में सियासी समीकरण ऐसे हैं, जहां पर बीजेपी से चुनावी मुकाबला करना विपक्ष के किसी भी दल के लिए अकेले आसान नहीं है. आरएलडी का राजनीतिक आधार पश्चिमी यूपी में है, जहां पर सपा का कोर वोट बैंक यादव नहीं है, लेकिन मुस्लिम मतदाता जरूर हैं. पश्चिम यूपी की सियासत में जाट, मुस्लिम और दलित काफी अहम भूमिका अदा करते हैं. आरएलडी का कोर वोटबैंक जाट माना जाता है तो मुस्लिमों पर कांग्रेस और सपा की नजर है. अगर जयंत चौधरी, बीजेपी के साथ गठबंधन करते हैं तो इंडिया गठबंधन के साथ-साथ अखिलेश यादव को बहुत बड़ा झटका लगेगा.
ऐसे में रालोद अध्यक्ष चौधरी जयंत सिंह की एनडीए के साथ जाने को लेकर बातचीत शुरू हुई तो सपा व कांग्रेस को चुनावी गणित गड़बड़ाने की चिंता हो गई है। इसलिए अब वह भी जयंत को मनाने में जुट गए हैं। यह कहा जा रहा है कि जयंत के साथ तय हुई सात सीटों में जहां अभी तक तीन पर अपने प्रत्याशी उतारने का दबाव बना रही थी, वहीं अब वह रालोद के प्रत्याशी ही उतारने के लिए राजी हो गई है। जबकि कांग्रेस भी राजस्थान में एक लोकसभा सीट देने को तैयार है। लेकिन अब हर किसी की नजर जयंत पर टिकी है कि वह किस तरफ रुख करते हैं।
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