खबर न्यू इंडिया (न्यूज़ डेस्क): पीएम मोदी ने लोकसभा में मंगलवार को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब दिया, सदन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति के अभिभाषण के प्रति आभार व्यक्त किया और अभिभाषण का केन्द्र बिन्दु रहे विकसित भारत के विचार पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत की राष्ट्रपति ने अपने अभिभाषण में महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए हैं। उन्होंने राष्ट्रपति के मार्गदर्शन के लिए उनका धन्यवाद भी किया। पीएम मोदी के 135 मिनट के भाषण के दौरान विपक्षी सांसद लगातार नारेबाजी करते रहे. लगभग सवा दो घंटे के भाषण में पीएम मोदी ने विपक्ष खासतौर पर कांग्रेस को आड़े हाथों लिया. मोदी ने लोकसभा में कहा, 'जनता ने हमें दुनिया के सबसे बड़े चुनाव अभियान में चुना है. मैं कुछ लोगों की पीड़ा समझ सकता हूं कि लगातार झूठ चलाने के बावजूद भी उनका घोर पराजय हुई.' मोदी ने कहा, 'लंबे अरसे तक देश ने तुष्टीकरण के शासन के मॉडल को भी देखा और हमने धर्मनिरपेक्षता का जो प्रयास किया वो भी देखा. हम तुष्टीकरण नहीं संतुष्टीकरण के विचार को लेकर चले हैं. पीएम ने लोकसभा में कहा, ' कांग्रेस पार्टी 2024 से परजीवी कांग्रेस पार्टी के रूप से जानी जाएगी... कांग्रेस जिस पार्टी के साथ गठबंधन करती है उसी पार्टी के वोट खा जाती है और अपनी सहयोगी पार्टी की कीमत पर फलती-फूलती है.' उन्होंने कहा, 'कांग्रेस पार्टी खुलेआम एक जाति को दूसरी जाति के खिलाफ लड़ाने के लिए रोज नए-नए नैरेटिव गढ़ रही है और नई-नई अफवाहें फैला रही है... मंचों से साफ-साफ घोषणा की गई कि यदि 4 जून को इनके मन का परिणाम नहीं आया तो आग लगा दी जाएगी. अराजकता फैलाना उनका उद्देश्य है.

प्रधानमंत्री ने 2014 से पहले के दौर को याद किया जब पूरा देश निराशा की स्थिति में था। नागरिकों के बीच विश्वास की कमी को उस दौरान देश के लिए सबसे बड़ी क्षति बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इससे निराशा के बादल छा गए थे। उन्होंने याद दिलाया कि यह घोटालों और नीतिगत पक्षाघात से भरा युग था जिसने देश को पांच कमजोर (फ्रैगाइल 5) अर्थव्यवस्थाओं की सूची में धकेल दिया था। उन्होंने कहा कि आम नागरिक सारी उम्मीदें खो चुके थे। उन्होंने कहा कि रिश्वतखोरी आम बात थी, चाहे वह घर के लिए हो, गैस कनेक्शन के लिए हो या सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से अनाज प्राप्त करने के लिए हो। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के नागरिक 2014 से पहले सरकार की खराब स्थिति के लिए अपने भाग्य को दोष देते हुए दैनिक जीवन को जीने के लिए मजबूर थे। उन्होंने कहा, “उन्होंने हमें चुना, बदलाव के दौर की शुरुआत की।”

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