मुजफ्फरनगर में राकेश टिकैत के नेतृत्व में भाकियू का अनिश्चितकालीन धरना जारी
मुजफ्फरनगर,खबर न्यू इंडिया (न्यूज़ डेस्क)। जीआईसी मैदान में भाकियू प्रवक्ता राकेश टिकैत के नेतृत्व में अनिश्चितकालीन धरना दूसरे दिन भी जारी रहा, आपको बता दे किसानों की समस्याओं को लेकर एक बार फिर भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने आंदोलन शुरू कर दिया है।किसानों के धरने का आज दूसरा दिन रहा, जिसमें चौधरी राकेश टिकैत रात में भी किसानों के बीच में ही रहे और सुबह होते ही किसानों के चाय नाश्ता और खाने पीने की व्यवस्था में जुट गए। इस दौरान मीडिया से बात करते हुए चौधरी राकेश टिकैत ने कहा कि दस फरवरी तक बजाज शुगर मिल बुढ़ाना अगर किसानों के गन्ने का भुगतान नहीं करता तो ग्यारह फरवरी से किसान बजाज शुगर मिल में गन्ना ना डालें, जो भुगतान करने में आनाकानी करती है।

उन्होंने कहा कि किसान ठंड और दूसरी परेशानियों से हटने वाला नहीं है, वह अपनी मांग मनवा कर रहेगा। गन्ना मूल्य बढ़ोतरी, बकाया भुगतान, बिजली बिल और आंदोलन में शहीद हुए किसानों के परिजनों को उचित मुआवजा दिलाने सहित एमएसपी की मांग को लेकर जीआईसी मैदान में भाकियू की ओर से 28 जनवरी से अनिश्चितकालीन धरने की घोषणा की गई थी। धरना स्थल पर मौजूद रहे किसान नेता चौधरी राकेश टिकैत ने कहा कि यह धरना खत्म होने वाला नहीं है। किसान आवारा पशुओं से परेशान है। गन्ना मूल्य नहीं बढ़ रहा है। भुगतान न होने के कारण उसके सभी काम रुके हुए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि आंदोलन में शहीद हुए जब हरियाणा और पंजाब के किसानों के परिजनों को मुआवजा मिल सकता है तो यूपी के क्यों नहीं?

उन्होंने कहा कि सभी किसान जिलाधिकारी और उप जिलाधिकारी कार्यालय पर गन्ना लेकर आए। वहां डीएम और एसडीएम की जिम्मेदारी होगी कि वे उस गन्ने को किस शुगर मिल को भेजेंगे और भुगतान की जिम्मेदारी भी अधिकारियों की ही रहेगी। उन्होंने कहा कि इसी मैदान से किसानों की समस्याओं का समाधान होना है। अगर किसान यहां जमे रहे तो किसानों की सभी समस्याओं का समाधान हो जाएगा। चौधरी राकेश टिकैत ने कहा जो किसान बजाज शुगर मिल पर गन्ना नहीं डालेगा, तो उसके गन्ने की जिम्मेदारी हमारी है, जिस शुगर मिल में भी उनका गन्ना जाएगा वहीं से भुगतान समय से होगा। उन्होंने यह भी कहा कि गन्ना उसी शुगर मिल में डाला जाए जो समय से भुगतान करता है।

रात हुई तो किसानों ने मैदान में ही अपनी झोपड़ी लगा ली। आंदोलन में डटे किसानों ने रागिनी और कव्वालियों के गायन के साथ रात गुजारी। रविवार रात जीआईसी मैदान का नजारा अजब-गजब था। कहीं रणसिंघा बज रहा था, तो कहीं से कव्वाली की आवाज आ रही थी।
#Rakesh Tikait,







