उन्नति, महिला उद्यमिता एवं प्रशिक्षण समिति द्वारा वनाग्नि रोकने हेतु किए जा रहे हैं निरंतर प्रयास
देहरादून, खबर न्यू इंडिया (न्यूज़ डेस्क): उत्तराखंड में अप्रैल से जून महीने में चीड़ की सूखी पत्तियाँ (जिसे स्थानीय रूप से "पिरुल" कहा जाता है) के कारण लगने वाली भीषण आग (फॉरेस्ट फायर, वनाग्नि) और उससे होने वाले नुकसान के बारे में हम सब अच्छे से जानते हैं। प्रकृति हमें वह सब कुछ देती है जो हमारी सुरक्षा और अस्तित्व के लिए आवश्यक है। लेकिन समस्याएँ तभी उत्पन्न होती हैं जब हम प्रकृति के संदेशों को नहीं सुनते हैं और सही समय पर उसके संसाधनों का उपयोग नहीं करते हैं। अप्रैल से जून के महीने में गिरने वाली (पाइन नीडल चीड़ के पर्णपाती पत्ते),घने जाल के रूप में जमीन को ढकती हैं,और जंगल मैं लगने वाली भीषण आग के प्रमुख कारण के रूप में पहचानी जाती हैं, जिससे पर्यावरण, वन जैव विविधता और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भारी खतरा होता है।
उत्तराखंड के जंगलों में लगने वाली भीषण आग की रोकथाम हेतु सबसे जरूरी यह है कि सही समय पर पेड़ के नीचे गिरा हुआ सूखा "पिरुल" हटाया जाए और उसका सही तरह से उपयोग किया जाए। इस दिशा में विचार करते हुए डॉक्टर भावना, सचिव उन्नति महिला उद्यमिता एवं प्रशिक्षण समिति, देहरादून(उत्तराखण्ड) ने अपनी समिति की महिलाओं के मदद से इस "पिरुल" से आज के फैशन उपभोक्ता ब मार्केट की मांग के अनुसार कई बहुउपयोग उत्पाद तैयार किये हैं।जैसे वीड कंट्रोल मल्च मेट,पेरुल ईको लाइनर, ईकोफ्रेंडली इंडोर व आउटडोर प्लांटर्स,प्लांट पौट्स आदि।
आजकल कस्टमर, प्रदूषण करने वाले प्लास्टिक की जगह पर मजबूत अच्छे व सुन्दर दिखने वाले ईकोफ्रेंडली प्लांटर्स को खरीदना बहुत पसंद करते हैं। इस तरह के उत्पाद बहुत फैशन व मांग में है।
डॉक्टर भावना का मानना है कि उत्तराखंड में चीड़ के जंगल में लगने वाली आग और उससे होने वाले नुकसान के बारे में जनता को समय से पहले जागरूक करना अति आवश्यक है। अगर हम "पिरुल" के उत्पादों को रिजॉर्ट, होटल, हॉस्पिटल, एजुकेशनल इंस्टीट्यूट आदि जगह रखेंगे तो लोगों में इस चीज़ की जागरूकता स्वतः ही जाग्रत होगी। इस समय छुट्टियों के मौसम में उत्तराखंड में देश विदेश से बड़ी मात्रा में पर्यटक आते हैं। इस प्रकार जब लोग "पिरुल" उत्पाद देखेंगे, तो उसके बारे में जानकारी लेंगे, और उसके पीछे छिपे मकसद जैसे फॉरेस्ट फाइर वनाग्नि, प्लास्टिक से होने वाले वातावरण प्रदूषण को रोकना, आदि के बारे में जाग्रत होंगे और उसके अधिक से अधिक प्रयोग के बारे में उत्साहित होंगे, इस प्रकार हर नागरिक फॉरेस्ट फायर रोकने में अपना बहुमूल्य योगदान दे सकता है।
उन्नति,समिति द्वारा इन उत्पादों को बनाने हेतु उत्तराखंड के विभिन्न स्थानों में लोगों को जंगल मैं लगने वाली भीषण आग के प्रमुख कारण बारे में जागरूकता उत्पन्न की जाएगी। महिलाओं, नवयुवक, ,नवयुवतियों,विद्यार्थियों,विभिन्न कारीगरों को "पिरुल" उत्पादों को बनाने, उनकी मार्केटिंग, उससे संबंधित सरकारी डिपार्टमेंट द्वारा प्रदान की गई सुविधाओं,योजनाओं,आदि पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। भविष्य में उनके लिए यह एक स्थानीय रोजगार का साधन निश्चित होगा।समिति द्वारा पिरुल के पेपर, बायोडिग्रेडेबल पाइन पैकेजिंग, बोर्ड आदि पर भी अनुसंधान जारी है।
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