मोदी सरकार का बड़ा कदम, देश में ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ पर कमेटी ने राष्ट्रपति को सौंपी रिपोर्ट
खबर न्यू इंडिया (न्यूज़ डेस्क): देश में ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ पर बड़ी खबर आ रही हैं, लोकसभा और राज्यों की विधानसभा के सहित विभिन्न निकायों के एक साथ चुनाव कराने के मुद्दे पर पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय समिति ने आज राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की और अपनी रिपोर्ट सौंपी. इस दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी मौजूद रहे. पिछले सितंबर में गठित समिति को मौजूदा संवैधानिक ढांचे को ध्यान में रखते हुए लोकसभा, राज्य विधानसभाओं, नगर पालिकाओं और पंचायतों के लिए एक साथ चुनाव कराने के लिए संभावनाएं तलाशने और सिफारिशें करने का काम सौंपा गया था. पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली इस समिति में गृह मंत्री अमित शाह, राज्यसभा में विपक्ष के पूर्व नेता गुलाम नबी आजाद, वित्त आयोग के पूर्व अध्यक्ष एन.के. सिंह, पूर्व लोकसभा महासचिव सुभाष कश्यप और वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे भी शामिल हैं. रिपोर्ट 18,626 पन्नों की है। इसमें पिछले 191 दिनों के हितधारकों, विशेषज्ञों और अनुसंधान कार्य के साथ व्यापक परामर्श का नतीजा शामिल है।
कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में क्या-क्या कहा
समिति ने कहा है कि पहले चरण में लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराए जा सकते हैं, जिसके बाद 100 दिन के अंदर दूसरे चरण में स्थानीय निकायों के चुनाव कराए जा सकते हैं। वहीं त्रिशंकु सदन, अविश्वास प्रस्ताव की स्थिति में शेष पांच साल के कार्यकाल के लिए नए सिरे से चुनाव कराए जा सकते हैं। कोविंद समिति ने कहा कि पहले चरण में लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराए जा सकते हैं, इसके बाद 100 दिन के अंदर दूसरे चरण में स्थानीय निकायों के चुनाव कराए जा सकते हैं।समिति ने एक साथ चुनाव कराने के लिए उपकरणों, कर्मचारियों और सुरक्षा बलों संबंधी जरूरतों के लिए पहले से योजना बनाने की सिफारिश की। इसके साथ ही निर्वाचन आयोग लोकसभा, विधानसभा, स्थानीय निकाय चुनावों के लिए राज्य चुनाव अधिकारियों के परामर्श से एकल मतदाता सूची, मतदाता पहचान पत्र तैयार करेगा।
प्रारंभ में हर दस साल में दो चुनाव होते थे. अब हर साल कई चुनाव होने लगे हैं. इससे सरकार, व्यवसायों, श्रमिकों, न्यायालयों, राजनीतिक दलों, चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों और बड़े पैमाने पर नागरिक समाज पर भारी बोझ पड़ता है. इसलिए समिति सिफारिश करती है कि सरकार को एक साथ चुनावों के चक्र को बहाल करने के लिए कानूनी रूप से व्यवहार्य तंत्र विकसित करना चाहिए. समिति की सिफारिश है कि पहले चरण में लोक सभा और राज्य विधानसभाओं के लिए एक साथ चुनाव कराए जाएं. दूसरे चरण में नगर पालिकाओं और पंचायतों के चुनाव लोकसभा और राज्य विधान सभाओं के साथ समन्वित होंगे. इस तरह से कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव होने के सौ दिनों के भीतर नगर पालिकाओं और पंचायतों के चुनाव हो जाएं.
देश की राजनीति में यह एतिहासिक बदलाव आना तभी संभव होगा, जब वर्तमान सरकार यानी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो तिहाई बहुमत के साथ सत्ता में लौटें। साथ ही, संवैधानिक बाध्यता है कि इस कानून को लागू करने से पहले देश के कम से कम आधे राज्यों की विधानसभाओं से पास कराना पड़ेगा। संभवतः यही कारण है कि भाजपा लगातार अपने लिए 370 सीटें और एनडीए के लिए 400 सीटों पर जीत का लक्ष्य लेकर चल रही है, जिससे लोकसभा चुनाव 2024 के बाद इस बिल को संसद से पास कराने में कोई परेशानी न होभाजपा का यह कोई नया एजेंडा नहीं है। उसके नेता पहले से एक देश, एक चुनाव की बात करते रहे हैं। इसके पीछे उनका तर्क देश को बार-बार के चुनावों से बचाना और आर्थिक बचत करना रहा है। इससे सहमत या असहमत होने के अपने-अपने कारण हो सकते हैं। लेकिन सत्य यह है कि इस विचार को कई विश्लेषक देश की अर्थव्यवस्था और विकास के लिए उचित समझते हैं। समिति ने 2029 में देश में एक साथ लोकसभा और सभी विधानसभाओं का चुनाव कराने का प्रस्ताव किया है। पहले चरण में लोकसभा और विधानसभाओं और बाद में दूसरे चरण में नगर निगम स्तर के चुनाव कराने का सुझाव दिया गया है।
कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल सहित विपक्ष के सभी दल यह आरोप लगा रहे हैं कि सरकार बड़ा जनमत हासिल कर संविधान में बड़े बदलाव करना चाहती है। जनता का साथ पाने के लिए वे आरोप लगा रहे हैं कि सरकार आरक्षण समाप्त करना चाहती है। लेकिन अब यह स्पष्ट हो चुका है कि सरकार बड़े बदलाव का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही है। देश के लिए यह एक बड़ा बदलाव होगा। इसके लिए देश की जनता को मानसिक तौर पर तैयार करना होगा।
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