खबर न्यू इंडिया (न्यूज़ डेस्क) : इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के बाद एएसआई ने वाराणसी में ज्ञानवापी परिसर का सर्वे फिर से शुरू कर दिया है, सर्वे को लेकर ज्ञानवापी परिसर के आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। एडीजी एएसआई आलोक त्रिपाठी की अगुवाई में 50 से अधिक एएसआई के अधिकारी और कर्मचारिय ज्ञानवापी परिसर की सर्वे में जुटी हुई है। ज्ञानवापी स्थित सील वजूखाने को छोड़कर शेष अन्य हिस्से का सर्वे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की टीम कर रही है। ज्ञानवापी के पहले दिन के सर्वे में एएसआई की टीम ने हिंदू धर्म चिन्हों को इकट्ठा करके एक जगह स्टोर किया. हिंदू स्मृति चिन्हों की फोटोग्राफी और विडियोग्राफी की गई. सर्वे के चलते ज्ञानवापी के हर 300 मीटर पर वज्र वाहन लगाए गए और आरएएफ के जवानों को काशी विश्वनाथ मंदिर के सभी गेट्स पर तैनात किया गया है. एटीएस के कमांडो ने सभी दरवाजों पर मोर्चा संभाला हुआ है.

हिंदू पक्ष का दावा है कि औरंगजेब ने 1669 में मंदिर ध्वस्त कराया और उसके ढांचे को बदल दिया। तभी हिंदू अपना अधिकार पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। अब कानूनी तरीके से अधिकार पाने के प्रयास में लगे हैं। वहीं, मुस्लिम पक्ष को इस दावे पर आपत्ति है। उसका कहना है कि ज्ञानवापी परिसर में 600 वर्षों से नमाज अदा की जा रही है।

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